कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के जनसंपर्क विभाग की उपनिदेशिका एवं इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज (आईआईएचएस) के दर्शनशास्त्र विभाग की अध्यक्ष डॉ. जिम्मी शर्मा को महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल की सर्वोच्च शैक्षणिक नीति-निर्माण संस्था अकादमिक परिषद का सदस्य नामित किया गया है। विश्वविद्यालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार डॉ. शर्मा सहित पांच बाह्य शिक्षाविदों को दो वर्ष के लिए परिषद का सदस्य मनोनीत किया गया है।
डॉ. जिम्मी शर्मा पिछले 18 वर्षों से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य कर रही हैं। वर्तमान में वह आईआईएचएस में दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष होने के साथ-साथ विश्वविद्यालय के जनसंपर्क विभाग में उपनिदेशिका और साहित्यिक क्लब की प्रमुख के रूप में भी दायित्व निभा रही हैं। वह कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय रिसर्च जर्नल के संपादकीय मंडल की सदस्य हैं। उनकी पांच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें कम्युनिकेटिव इंग्लिश, कम्युनिकेटिव इंग्लिश-1, नयनतारा सहगल: ए क्रिटिकल स्टडी, इकोज़ विदिन, पोएम्स तथा एडवांस्ड कम्युनिकेटिव इंग्लिश शामिल हैं। इसके अलावा उनके 25 से अधिक शोध-पत्र यूजीसी-केयर सूचीबद्ध और समीक्षित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। डॉ. जिम्मी शर्मा ने इस मनोनयन पर महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत का आभार व्यक्त किया। डॉ. जिम्मी शर्मा ने पांच पुस्तकें लिखी हैं, जबकि 25 से अधिक शोध-पत्र प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। भगवद्गीता पर आधारित उनके चार शोध-पत्र विशेष रूप से चर्चित रहे हैं। इसके अलावा उनकी कविताएं अनेक प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं और वह अपने ब्लॉग इकोज़ विदिन के माध्यम से भी नियमित लेखन करती हैं। संवाद
कुरुक्षेत्र। डॉ जिम्मी शर्मा।