देश में मुफ्त की रेवड़ियां बांटने (कई प्रकार की योजनाओं का मुफ्त लाभ देने) का लालच देकर वोट बटोरने का कल्चर लाने की भरसक कोशिश हो रही है। कल्चर के अनुसार एक तरफ जहां मुफ्त की योजनाओं से जरूरतमंदों को लाभ होगा। वहीं इससे बहुत से लोगों को मुफ्त की आदत भी पड़ सकती है जो कि देश के भविष्य के लिए बहुत खतरनाक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस कल्चर से देश के लोगों को और खासकर के युवाओं को सावधान रहने के लिए कहा है। योजनाओं से युवाओं का वर्तमान बिगड़ सकता है और आने वाला कल अंधेरे में सिमट सकता है। इस गंभीर मुद्दे पर अमर उजाला द्वारा रविवार को संवाद आयोजित किया गया। जिसमें से कई युवाओं ने मुफ्त की योजनाओं को जनता के लिए लाभदायक बताया तो किसी ने इससे होने वाले नुकसान पर चर्चा की।
सागर ने कहा कि मुफ्त की योजनाओं के लालच में आकर युवा गलत दिशा में जाते हैं। जिन्हें बिना कुछ करे सब कुछ मिल रहा है उन्हें लगता है कि अब तो कुछ करने की जरूरत ही नहीं है। उस वजह से बेरोजगारी को बढ़ावा मिलता है।
संजय कुमार ने कहा कि युवाओं को मुफ्त की योजना देने के विपरीत उन्हें कुछ करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। ऐसी योजनाओं युवाओं को मांग कर खाने की प्रवृत्ति पैदा करती हैं। सभी को सचेत रहना होगा।
रामदास ने कहा कि मुफ्त योजनाओं के लालच में आकर युवा आज के चक्कर में अपना कल बर्बाद न करें। इस योजनाओं से हमें दो या चार दिन तो अच्छा महसूस होगा, लेकिन समय बीतने पर एक दिन एहसास होगा कि इन योजनाओं ने हमें कितना लाचार कर दिया है।
राजेंद्र पठानिया ने कहा कि वोट के लालच में अक्सर नेता कई प्रकार के मुफ्त के लाभ देने के वादे करते हैं। उस समय हमें उनकी बातों को अच्छे से टटोल लेना चाहिए। हमें सोचना चाहिए कि इन वादों से हमारा क्या अच्छा होगा और क्या बूरा।
सचिन कौशिक ने कहा कि इन मुफ्त की योजनाओं से जरूरतमंदों को काफी सहारा मिलता है। देश में आज भी कई परिवार ऐसे हैं, जिनके पास आय कोई ठीक साधन नहीं हैं। घर में दो चूल्हा भी बड़ी मुश्किल से जलता है। ऐसे में इन योजनाओं ने उन्हें काफी लाभ पहुंचता है। जो कि अच्छा है।
रविंद्र सैनी ने कहा कि मुफ्त की योजनाएं उन लोगों के लिए तो ठीक है जिनके पास आय का कोई साधन नहीं है, लेकिन साधन संपन्न लोग भी इन योजनाओं का लाभ उठाने लगा जाते हैं तो यह उन्हें आगे बढ़ने की जगह पीछे धकेलने लग जाती हैं। लोगों को मुफ्त में सब कुछ पाने की आद पड़ जाती है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के छात्र विकास बलाही ने कहा कि सिर्फ शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधित योजनाओं की मुफ्त होनी चाहिए। इसके अलावा अन्य सभी प्रकार योजनाओं का मुफ्त लाभ देने से सरकार को नुकसान पहुंचता है, जिसकी भरपाई बाद में जनता से ही की जाती है। कुल मिलाकर यह योजनाएं सिर्फ नाम की ही मुफ्त रह जाती हैं।