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Kurukshetra News: सरस्वती की ऐतिहासिकता और वैज्ञानिक प्रमाणों पर किया मंथन

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कुरुक्षेत्र। कांफ्रेंस में विचार साझा करते कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल। संवाद
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में हरियाणा सरस्वती हेरिटेज डेवलपमेंट बोर्ड और दर्शन लाल जैन सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर रिसर्च ऑन सरस्वती रीवर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। सरस्वती नदी-भारतीय ज्ञान प्रणाली और संस्कृति की जननी विषय पर दो दिन तक देश-विदेश के विद्वानों ने मंथन किया।
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समापन सत्र के मुख्यातिथि हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी पंचकुला के वाइस चेयरमैन डॉ. कुलदीप अग्निहोत्री ने कहा कि सरस्वती नदी सप्त सिंधु क्षेत्र की प्रमुख नदी रही है जिसके वेदों, पुराणों, लोक साहित्य और वैज्ञानिक प्रमाण आज भी उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि नॉर्थ वेस्ट इंडिया वस्तुतः सप्त सिंधु क्षेत्र ही है। अंग्रेजी इतिहासकारों ने सरस्वती नदी को मिथक बताकर भारतीय इतिहास को विकृत किया जिसके कारण लोगों ने इसे लुप्त मान लिया। किसी भी देश का भूगोल उसके इतिहास और संस्कृति को निर्धारित करता है। भारत की समृद्ध सभ्यता जम्बूद्वीप में विकसित हुई थी लेकिन औपनिवेशिक काल में इसे नष्ट करने का प्रयास किया गया। प्रकृति ने भारत की सीमाएं स्वयं बनाई हैं। उन्होंने आह्वान किया कि सरस्वती नदी के लिए सकारात्मक और वैज्ञानिक सोच विकसित करनी होगी, तभी इसे धरातल पर लाने के प्रयास सफल होंगे।

विवि कुलसचिव प्रो. वीरेंद्र पाल ने कहा कि सरस्वती नदी की वैज्ञानिक प्रमाणिकता स्थापित हो चुकी है लेकिन समाज की मानसिकता में परिवर्तन आवश्यक है। भारतीय सभ्यता अत्यंत उन्नत थी, जिसे आक्रांताओं के दौर में भुला दिया गया। हाल ही में अजंता-एलोरा की गुफाओं में अंकित पैटर्न पर आधारित नारियल की रस्सियों से बने कौंडिन्य जहाज की गुजरात से ओमान तक की सफल यात्रा हमारे पूर्वजों के वैज्ञानिक ज्ञान का प्रमाण है। केंद्र के निदेशक प्रो. एआर चौधरी ने कॉन्फ्रेंस की रिपोर्ट प्रस्तुत की और कहा कि पद्मश्री दर्शन लाल जैन के सानिध्य में सरस्वती नदी की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, पौराणिक और आध्यात्मिक विरासत पर गहन चर्चा हुई। सनातन संस्कृति का उद्भव करोड़ों वर्ष पूर्व माना जाता है। हरियाणा सरस्वती हेरिटेज डेवलपमेंट बोर्ड की रिसर्च ऑफिसर दीपा नथालिया ने कॉन्फ्रेंस को सरस्वती संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। इस मौके पर डॉ. लक्ष्य बिंद्रा सहित शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

कुरुक्षेत्र। कांफ्रेंस में विचार साझा करते कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल। संवाद

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