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Kurukshetra News: आयुर्वेद के योगदान विषय पर किया मंथन

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कुरुक्षेत्र। दयानंद महिला महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग, काउंसलिंग सैल एवं यूथ रेडक्रॉस के सहयोग में व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें महिला स्वास्थ्य को उन्नत करने में आयुर्वेद के योगदान विषय पर विद्यार्थियों को जानकारी दी गई।
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मुख्य वक्ता राष्ट्रीय आयुर्वेदिक संस्थान जयपुर से प्रसूति तंत्र एवं स्त्री रोग विभाग की एसोसिएट प्रो. डाॅ. हेतल हरीशभाई दवे ने कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग रहा है। आयुर्वेद महिलाओं के स्वास्थ्य और कल्याण को बनाए रखने में अहम भूमिका का निर्वाह करता है। महिला के स्वस्थ होने का अर्थ परिवार और समाज का स्वस्थ होना है। उन्होंने कहा कि भारतीय आयुर्वेद विश्व विख्यात चिकित्सा पद्धति रही है। त्वरित चिकित्सा लाभ के लिए भी इस चिकित्सा पद्धति का खूब प्रयोग किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत से विपरीत प्रभाव पड़ते हैं लेकिन आयुर्वेद में इन सभी विपरीत प्रभावों के निदान के लिए समाधान उपस्थित हैं। वर्तमान में छोटी बीमारियों के इलाज के लिए अस्पताल की तरफ भागते हैं और दर्दनिवारक गोली खा लेते हैं, जिससे भविष्य में कैंसर, किडनी और लीवर संबंधी अनेक गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। छोटी समस्याओं का समाधान हमारे परंपरागत रसोईघर में ही मौजूद है। महिलाओं से जुड़े अनेक स्त्री रोगों को भी आयुर्वेद की मदद से आसानी से ठीक किया जा सकता है। इस मौके पर प्राचार्या डाॅ. उपासना आहुजा, संयोजिका डाॅ. उर्मिला पंघाल, डाॅ. सीमा सिंह, डाॅ. श्वेता सैनी सहित अन्य शिक्षक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
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