संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में यूजीसी प्रायोजित द्वि-साप्ताहिक बहु-विषयक पुनश्चर्या पाठ्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके छठे दिन दिनभर चले इन सत्रों में पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास, नैतिक आचरण और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया।
प्रथम सत्र में भूविज्ञान विभाग के डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और जनसहभागिता से ही सतत जल प्रबंधन संभव है। द्वितीय सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के शिवाजी कॉलेज से डॉ. अश्विनी शर्मा ने रिस समझौता, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और क्योटो प्रोटोकॉल जैसे वैश्विक समझौतों की प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए कहा कि इनके प्रभावी क्रियान्वयन से ही जलवायु संकट को कम किया जा सकता है।
तीसरे सत्र में कुवि के दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र की निदेशक प्रो. मंजुला चौधरी ने कहा कि शिक्षक समाज के नैतिक मार्गदर्शक होते हैं और उनके आचरण से विद्यार्थियों के मूल्य निर्माण की प्रक्रिया प्रभावित होती है। अंतिम सत्र में डॉ. हरदीप राय शर्मा, पर्यावरण अध्ययन संस्थान, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए ठोस नीति और व्यापक जन-जागरूकता अनिवार्य है।