कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के यूआईईटी संस्थान में आधुनिक और भविष्य के ऊर्जा ग्रिडों में हार्मोनिक्स और बिजली की गुणवत्ता से उत्पन्न चुनौतियों विषय पर आधारित विशेष व्याख्यान दिया गया।
डेनमार्क से आए अंतरराष्ट्रीय इलेक्ट्रोटेक्निकल कमीशन के नामित विशेषज्ञ डॉ. दिनेश कुमार ने कहा कि विकसित भारत के लिए ऊर्जा क्षेत्र को उन्नत करने की जरूरत है। इसके लिए मौजूदा और भविष्य के ग्रिडों में बिजली की गुणवत्ता की चुनौतियों का समाधान करने की आवश्यकता है। भविष्य के ग्रिड को ऐसे मानकों की आवश्यकता है जो उससे जुड़ी प्रौद्योगिकियों की तरह ही तेजी से विकसित हों।
डॉ. दिनेश कुमार डेनमार्क की रिसर्च लैब में बतौर इंजीनियरिंग विशेषज्ञ कार्यरत है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में फ्रिक्वेंसी लेवल अलग है जिस पर निरंतर कार्य चल रहा है।
हम किस प्रकार हार्मोनिक्स औद्योगिक उपकरणों और वितरण ट्रांसफार्मर में कैपेसिटर जैसे प्रमुख घटकों तथा अक्षय ऊर्जा प्रवेश वाली साइटों, जैसे कि सौर फार्म और पवन-आधारित माइक्रोग्रिड, उपयोगिताओं ने कैपेसिटर विफलता और ट्रांसफार्मर ओवर हीटिंग की समस्या को कैसे दूर कर सकते हैं। इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए उन्होंने नई शमन तकनीकों की एक श्रृंखला विकसित की है।
उनके समाधान, दो स्वीकृत पेटेंट और कई प्रकाशनों की ओर से समर्थित, लागत प्रभावी और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं, जिन्हें नए और मौजूदा दोनों प्रणालियों में एकीकृत किया जा सकता है। पेटेंट किए गए तरीकों में से एक में कनवर्टर का एक नया डिजाइन शामिल है जो ग्रिड स्थितियों के लिए गतिशील रूप से अनुकूल होता है तथा ओवर हीटिंग की समस्या को कम करता है।