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Kurukshetra News: डायबिटिक रेटिनोपैथी रोग की विस्तार से जानकारी दी

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कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम को संबो​धित
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कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के शालाक्य विभाग की ओर से आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम के तीसरे दिन बुधवार को आयुर्वेदिक एवं यूनानी कॉलेज एवं अस्पताल तिबिया, नई दिल्ली के शालाक्य विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार चोकर और करनाल स्थित डॉ. पसरीचा मेमोरियल आई एंड डेंटल हॉस्पिटल के वैद्य संजय अरोड़ा ने शिरकत की।
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प्रो. चोकर ने विशेष रूप से मधुमेह जन्य नेत्र रोग (डायबिटिक रेटिनोपैथी) पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शुगर के मरीजों को नियमित रूप से अपनी आंखों की जांच करानी चाहिए, क्योंकि उपचार में देरी होने पर अक्सर मरीज अपनी आंखों की रोशनी खो बैठते हैं। उन्होंने कहा कि जहां आधुनिक चिकित्सा में इस स्थिति में लेजर थेरेपी का सहारा लिया जाता है, वहीं आयुर्वेदिक औषधियों से भी इस रोग का सफल उपचार संभव है।

इसके साथ ही प्रो. राजेश कुमार चोकर ने नेत्र शरीर का गहन विश्लेषण करते हुए कहा कि आयुर्वेद में नेत्र को इंद्रियों में सर्वोच्च स्थान दिया गया है, क्योंकि यह ज्ञानेंद्रियों में सबसे सूक्ष्म और महत्वपूर्ण है। उन्होंने नेत्र का संपूर्ण शास्त्रीय विवरण देते हुए आयुर्वेदिक और आधुनिक चिकित्सा पद्धति का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष कुमार मेहता, शालाक्य तंत्र विभाग की चेयरपर्सन प्रो. आशु, प्रो. मनोज कुमार तंवर समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक और शोधार्थी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
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आधुनिक उपकरणों से जांच की बारीक ट्रेनिंग
डॉ. संजय अरोड़ा ने अपने सत्र में आधुनिक मशीनों की मदद से आंखों के पर्दे (रेटिना) की जांच करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने प्रतिभागियों को व्यावहारिक रूप से मशीनों का उपयोग करना सिखाया और नवीनतम तकनीकों की जानकारी दी।

कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम को संबोधित

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