संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। श्री जयराम विद्यापीठ में पितृ पक्ष के अवसर पर आयोजित भागवत पुराण की कथा का विधिवत मंत्रोच्चारण, पूजन तथा आरती के साथ शनिवार को समापन हुआ। कथा के समापन से पूर्व विद्यापीठ की मुख्य यज्ञशाला में चल रहे गायत्री पितृ जप अनुष्ठान की यजमान परिवार द्वारा पूर्णाहुति दी गई। कथा के समापन पर व्यासपीठ पर यजमान परिवार के परिवार के सदस्यों ने आरती की।
कथा के अंतिम दिन व्यासपीठ पर विराजमान कथावाचक आचार्य प. रणबीर भारद्वाज ने संगीतमयी शैली में कथा में भगवान कृष्ण के घटनाक्रमों का वर्णन कर श्रद्धालुओं को कृष्ण भक्ति में झूमने पर मजबूर कर दिया। कथावाचक ने सुदामा चरित्र की कथा के साथ राजा परीक्षित का मोक्ष एवं भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन की कथा सुनाते हुए कथा को विराम दिया। कथा में श्रद्धालु नाचते, थिरकते नजर आए। भगवान की भक्ति को मुक्ति पाने का माध्यम बताते हुए आचार्य रणबीर भारद्वाज ने भजन के साथ इसका वर्णन किया। अपनी भजन प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उन्होंने आखिरी दिन की कथा में राजा परिक्षित को शुकदेव द्वारा सुनाई जा रही भागवत कथा के अंतिम चरण का वृतांत सुनाते हुए सुदामा के चरित्र का वर्णन किया। कथा प्रसंग में सुदामा का द्वारिकाधीश से मिलने जाना, पहरेदारों द्वारा सुदामा को द्वारिका के द्वार पर ही रोक देना और श्रीकृष्ण को सुदामा के आने का पता चलने पर नंगे पैर दौड़ते हुए बिना पितांबर धारण किये अपने परम मित्र सुदामा से मिलने जाना, सुदामा का आतिथ्य का जब वर्णन किया तो सभी भक्तगण भाव -विभोर हो उठे।
कथावाचक रणबीर भारद्वाज ने बताया कि सुदामा की मित्रता को निभाकर भगवान ने अपने दीन दयालु नाम को सार्थक किया। कृष्ण सुदामा की कथा के मार्मिक प्रसंग को सुनते श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गई। कथा से यह संदेश मिलता है कि मित्रता में पद और प्रतिष्ठा को आड़े नहीं आना चाहिए।