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अब सताने लगा डेंगू का डंक

Sun, 28 Aug 2016 01:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
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अस्पताल में लगी मरीजों की लाइन। - फोटो : Amar Ujala
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मच्छरों के लार्वा लगातार मिलने और सख्ती के बीच अब डेंगू के डंक ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। कथित डेंगू संदिग्ध एक मरीज की शुक्रवार की देर रात मौत हो गई, जबकि सिविल अस्पताल में तीन वर्षीय एक बच्चे की रिपोर्ट डेंगू रिएक्टिव पाई गई है। हालांकि जिस व्यक्ति की मौत हुई है, स्वास्थ्य विभाग उसे डेंगू का मरीज नहीं मान रहा है। लेकिन परिजनों के मुताबिक उसे डेंगू ही हुआ था। उधर, बच्चे की रिपोर्ट आने के बाद भी अधिकारी इस मामले में अनभिज्ञता जता रहे हैं, लेकिन अंदरखाने हलचल बढ़ गई है। अच्छी बात यह है कि बच्चे की हालत ठीक है और उसके प्लेटलेट्स रेट भी ठीक है।
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जिले में डेंगू की रोकथाम के लिए महकमे की टीम पिछले दो माह से सक्रिय है। जगह-जगह लार्वा मिलने पर नोटिस भी थमा रही है। महकमे का दावा है कि किसी भी तरह से डेंगू को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन शहर के ही तीन वर्षीय एक बच्चे की रिपोर्ट में डेंगू रिएक्टिव आने से महकमे के अधिकारियों की सांसें फूल गई हैं।

पिपली निवासी 55 वर्षीय कमल की शुक्रवार देर रात करीब साढ़े 12 बजे मौत हो गई। वह कई दिनों से बीमार था। परिजनों की मानें तो उसे डेंगू हो गया था। उसकी रिपोर्ट में प्लेटलेट्स काफी कम हो गई थी। परिजनों ने कुछ दिन पहले सिविल अस्पताल कुरुक्षेत्र में दाखिल कराया था  लेकिन मरीज की गंभीरता के चलते पीजीआई चंडीगढ रेफर कर दिया था। हालांकि डेंगू की जांच संबंधित रिपोर्ट परिजनों के पास नहीं हैं। ऐसे में स्वास्थ्य महकमा भी इसे डेंगू नहीं मान रहा है। अधिकारियों के मुताबिक प्लेटलेट्स कई कारणों से कम हो जाती है।
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बच्चे का चल रहा है इलाज
शहर की एक कॉलोनी में रहने वाले कृष्ण के तीन वर्षीय बेटे हार्दिक की तबीयत खराब होने पर उसे 22 अगस्त को सुबह पौने नौ बजे सिविल अस्पताल में दिखाया गया था। डॉक्टर ने बुखार की दवाएं देकर उसे घर भेज दिया था। इसके बाद भी जब वह ठीक नहीं हुआ तो परिजन उसे दोबारा 26 अगस्त शुक्रवार को सिविल अस्पताल में लेकर आए। यहां डॉक्टर ने उसके ब्लड टेस्ट सहित अन्य टेस्ट करवाए। रिपोर्ट में में हार्दिक को डेंगू रिएक्टिव पाया गया। इसके बाद मरीज के प्लेटलेट्स चेक किए गए जो 1.8 प्रतिघन सेंटीमीटर आए हैं। वहीं मरीज का हिमोग्लोबीन 10.4 ग्राम आया है।  

विभाग को हाल ही में मिली शाबाशी
श्रावण माह में यहां डेंगू का एक भी मरीज नहीं मिला था। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सीएमओ कुरुक्षेत्र की रिपोर्ट पर पीठ थपथपाई गई थी।  

कारण
एडिस एजेप्टी मच्छर के काटने से फैलता है डेंगू। इसके प्रारंभिक लक्षणों में मुख्यत: सबसे पहले बुखार, तेज दर्द, सिरदर्द, मासपेंशियों व जोड़ों में दर्द, शरीर पर लाल चकतों का बनना, निरंतर चक्कर आना, दस्त लगना, भूख न लगना है।

बचने के उपाय
डेंगू होने की स्थिति में कई आयुर्वेदिक विशेषज्ञ बताते हैं कि पपीते के पत्तों का रस पीना चाहिए। साथ ही बकरी के दूध का सेवन भी किया जा सकता है। यह शरीर में प्लेटलेट्स की मात्रा को कम नहीं होने देते हैं। वहीं स्वस्थ व्यक्ति की ओर से संबंधित मरीज को प्लेटलेट्स देकर भी आसानी से मरीज को बचाया जा सकता है। साथ ही समय पर चिकित्सा सुविधा और परामर्श मरीज की जिंदगी को बचा सकती है।  

प्लेटलेट्स का स्तर हो जाता है बहुत कम
विशेषज्ञ डाक्टरों की मानें तो डेंगू कोई गंभीर बीमारी नहीं है। इसमें संबंधित मरीज के प्लेटलेट्स बहुत कम हो जाते हैं। रक्त में मौजूद प्लेटलेट्स प्रतिघन सेंटीमीटर में 20 हजार के आसपास हो जाए तो स्थिति गंभीर हो जाती है और मरीज को जितना जल्दी हो सकें प्लेटलेट्स चढ़ाए जाते हैं।

पिछले साल का आंकड़ा
स्वास्थ्य विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 में डेंगू के 195 केस मिले थे और मलेरिया के करीब 200 केस सामने आए थे।

डेंगू के मरीज में प्लेटलेट्स के स्तर को देखा जाता है। मरीज को प्लेट्लेटस देकर आसानी से बचाया जा सकता है। वहीं डेंगू के 80 प्रतिशत मरीज आसानी से ठीक हो जाते हैं। वहीं केवल 20 प्रतिशत के लिए ही स्थिति खतरनाक साबित होती है।
-डॉ. शैलेंद्र ममर्गाईं शैली, फिजीशियन एवं हृदय रोग विशेषज्ञ

मरीज में डेंगू रिएक्टिव होने की जांच जारी है। संबंधित मरीज का ध्यान रखा जा रहा है। घबराने की जरूरत नहीं है। मरीज के प्लेटलेट्स कंट्रोल में है और दवाई शुरू कर दी है।
डॉ. एसके नैन, जिला सिविल सर्जन


वायरल ने बढ़ाया अस्पताल का दर्द
कुरुक्षेत्र। बरसाती मौसम में चल रहे वायरल ने सिविल अस्पताल का दर्द बढ़ा दिया है।  अस्पताल में इस प्रकार के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। यह वायरल पहले चार दिनों तक बुखार के रूप में मरीज में रहता है फिर उसके बाद हालात खराब होती रहती है।  उल्टियां, दस्त, चक्कर आना, तेज बुखार होना आदि मुख्य रूप से दिखाई देता है। यह वायरल अधिकतर बुजुर्गों और बच्चों को आसानी से अपनी चपेट में ले रहा है। सिविल अस्पताल के फिजीशियन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने बताया कि सिविल अस्पताल में वायरल बुखार से संबंधित मरीजों की संख्या प्रतिदिन 20 के आसपास है। इनके अलावा अन्य बुखार व मलेरिया से संबंधित मरीज भी लगातार चिकित्सा सलाह व दवाई लेने आ रहे हैं। उनकी मानें तो आने वाले समय में वायरल अधिक होने की संभावना के चलते लोगों को ऐहतियात बरतने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि अगर एक परिवार में किसी को वायरल हो गया है तो परिवार के अन्य सदस्यों को भी अपनी चपेट में ले सकता है। इसके लिए पूरे परिवार को चिकित्सक से परामर्श लेने की आवश्यकता है।

बचाव
सिविल अस्पताल के फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने बताया कि वायरल से लड़ने के लिए व्यक्ति को अत्यधिक प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करना चाहिए। जितना हेल्दी व्यक्ति होगा वायरल का असर उस पर उतना ही कम होगा। यदि कोई पहले से ही बीमार है तो तुरंत प्रभाव से अपने रक्त का लैब में जांच कराएं और संबंधित डॉक्टर से दवाई लेना शुरू कर दें। साथ ही पानी जमा क्षेत्रों में न जाएं, बारिश से बचें, बेहतर डाइट लें। अपने रहने के आसपास किसी भी जगह पानी को जमा न होने दें।
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