कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी की कार्यकारी परिषद (ईसी) ने सोमवार को एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ के मामले में प्रोफेसर को दोषी माना और इस पर कड़ा फैसला लिया है। ईसी के सदस्यों ने प्रोफेसर को सहायक प्रोफेसर के पद पर डिमोट कर दिया और साथ ही अगले पांच वर्षों तक किसी भी छात्र को पीएचडी कराने से रोक लगा दी है।
इतना ही नहीं जब तक शिकायतकर्ता छात्रा की पीएचडी नहीं होगी, तब तक उन्हें फोर्स लीव पर भेजने का फैसला किया गया है। सोमवार को हुई ईसी की बैठक में 49 विभिन्न मुद्दों पर काफी चर्चा की गई। बैठक करीब साढ़े तीन घंटे तक चली।
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी की कार्यकारी परिषद की बैठक केयू के कार्यवाहक कुलपति हरदीप सिंह की अध्यक्षता में हुई। इस दौरान रजिस्ट्रार, सभी विभागों के डीन व ईसी के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में 49 मुद्दों को चर्चा के लिए प्रस्तुत किया गया। इनमें सबसे अहम मुद्दा यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नोलोजी विभाग में एक रिसर्च स्कॉलर छात्रा के साथ एक प्रोफेसर (गाईड) द्वारा जबरदस्ती करने के मामला रहा। पिछली बैठक में आरोपी प्रोफेसर की व्यक्तिगत सुनवाई हुई थी। हालांकि आरोपी प्रोफेसर को यूनिवर्सिटी ने जांच में दोषी पाया था। इस मामले में यूनिवर्सिटी के ईसी सदस्यों के सामने संबंधित प्रोफेसर ने अपनी गलती को स्वीकार कर लिया था। जिसके बाद इस मामले में फैसले के लिए बैठक में आज सभी सदस्यों ने गहन मंथन किया। इस दौरान फैसला दिया कि आरोपी प्रोफेसर को डिमोट कर दिया जाता है।
सहायक प्रोफेसर के पद से जहां से वेतन की शुरुआत हुई थी, वहीं से वेतन दिया जाएगा। इसके साथ ही अगले 5 वर्ष तक पीएचडी के गाईड बनने पर रोक लगाई और साथ ही शिकायतकर्ता छात्रा की पीएचडी सबमिट करने तक उसे फोर्स लीव पर भेज दिया जाएगा। वहीं, एक अन्य फैसला तीन पदों पर नौकरी के मामले को लेकर रहा। हालांकि कुलपति ने मामला डेफर कर दिया, लेकिन तीन लोगों ने इसका विरोध किया। प्रिंसिपल नोमिनी डॉ. सुभाष तंवर, चांसलर नोमिनी प्रो. केसी यादव और कॉलेज टीचर्स नोमिनी डॉ. राजबीर ने विरोध जताते हुए लिफाफा खोलने की बात कही।
मामला दो लाइब्रेरियन और म्यूजिक विभाग में सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति का है। इसके साथ ही कॉमर्स विभाग के ही एक लेक्चरर पर भी किसी अमेरिकन प्रोफेसर की रिसर्च को अपने नाम से रिसर्च पेपर प्रकाशित करने का आरोप है। इस मामले में संबंधित प्रोफेसर को भी व्यक्तिगत सुनवाई के लिए समय दिया गया है। वहीं, कुलपति के पूर्व ओएसडी एसपी बत्रा के मामले पर भी जोर शोर से चर्चा की गई और बाद में यह फैसला लिया गया कि उसे पेंशन भत्ते जारी कर दिए जाएं। बता दें कि कुलपति के पूर्व ओएसडी पर आरोप थे कि उनकी पदोन्नति गलत है और इसी वजह से उनके सभी पेंशन आदि सेवानिवृत्ति भत्तो पर रोक लगा रखी थी। वहीं, मॉस कॉम विभाग के एक लेक्चरर पर आरोप था कि उनका जाति प्रमाण पत्र झूठा है। लेकिन उसे सही माना गया है। इसके अलावा भी कई अन्य कॉलेजों और संस्थानों को लेकर ईसी की बैठक में फैसले लिए गए हैं।