पंजाब एवं हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि नृत्य और संगीत में भारत और हरियाणा की पहचान छिपी हुई है। नृत्य संगीत से देश व प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सहजता से पहचाना जा सकता है। आज भी नृत्य और संगीत देश की भावी पीढ़ी को भारत और हरियाणा की संस्कृति की पहचान की यादों को तरोताजा कर रहा है। राज्यपाल प्रो. सोलंकी मंगलवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सभागार में युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग की तरफ से आयोजित चार दिवसीय रत्नावली हरियाणा दिवस राज्य स्तरीय समारोह के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे।
राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने रत्नावली महोत्सव के शुभारंभ की घोषणा करते हुए प्रदेश के कोने-कोने से भाग लेने वाले विद्यार्थियों, विश्वविद्यालय अधिकारियों व महोत्सव से जुड़े तमाम लोगों को सफल आयोजन की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि रत्नावली महोत्सव में हरियाणा के हर कला क्षेत्र के रत्न कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इस सभागार में एकत्रित हुए हैं। यहां पर संगीतमय यात्रा और महाभारत नृत्य नाटिका में कला के हर रंग को देखा गया। इन प्रस्तुतियों में नृत्य और संगीत के माध्यम से जो संदेश दिया गया है उस संदेश को आज आत्मसात करने की जरूरत है।
हरियाणा की संस्कृति को सहेज रहा केयू
उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इसी प्रांगण में 1985 से रत्नावली जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत की गई और लगातार पिछले 30 वर्षों से इस कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया जा रहा है। 30 वर्ष पूर्व 8 विधाओं और 300 कलाकारों से शुरू हुई रत्नावली आज 31 विधाओं तक पहुंचने और 3500 से ज्यादा विद्यार्थियों की शिरकत करने से यह साबित होता है कि केयू हरियाणा प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का अनूठा कार्य कर रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय भले ही क्रीड़ा के क्षेत्र में देश में दूसरे स्थान पर है, नैक की रैंकिंग में दसवें स्थान पर है लेकिन रत्नावली के इस सांस्कृतिक महाकुंभ में हरियाणा की पहचान, विरासत और स्वाभिमान को संजोकर यह साबित कर दिया है कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय नंबर एक स्थान पर है।
महोत्सव की अपनी पहचान
कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी ने कहा कि रत्नावली महोत्सव अपनी एक पहचान बना चुका है। मंच के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति को जानने और पहचानने का अवसर मिल रहा है। केयू कुलपति हरदीप कुमार ने कहा कि रत्नावली का आयोजन पिछले 30 वर्षों से किया जा रहा है। इस बार भी इस महोत्सव में कुछ नई विधाओं को प्रतियोगिता में जोड़ा है। इस वर्ष इस उत्सव का मुख्य थीम बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ रखा है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक डॉ. महा सिंह पूनिया ने कहा कि इस वर्ष रत्नावली महोत्सव में संगीतमय यात्रा की विशेष प्रस्तुति के माध्यम से हरियाणा के वैदिक काल से लेकर अब तक की सांस्कृतिक विरासत को नृत्य एवं संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा महाभारत नृत्य नाटिका को भी पहली बार इस मंच के माध्यम से दर्शकों के सामने रखा गया है।
केयू कुलसचिव डॉ. प्रवीण सैनी ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत में कुलपति हरदीप कुमार ने राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी को स्मृति चिन्ह व कलाकारों द्वारा निर्मित पीढ़ा भी भेंट किया, साथ ही सांसद राजकुमार सैनी, थानेसर विधायक सुभाष सुधा, लाडवा विधायक पवन सैनी, अंबाला मंडल की आयुक्त नीलम प्रदीप कासनी को भी स्मृति चिन्ह भेंट किया। इस मौके पर डीसी सीजी रजीनिकांतन, एसपी सिमरदीप सिंह, सांस्कृतिक परिषद की प्रधान डॉ. वरिंद्र गांधी, डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. अनिल वशिष्ठ सहित विश्वविद्यालय के डीन, प्रोफेसर, शिक्षक और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।