नोटबंटी का सबसे ज्यादा असर मजदूर, किसानों व आढ़तियों पर पड़ रहा है। जिसको लेकर सभी वर्गों में अफरातफरी का है। लोग अपनी सारी दिनचर्या भूल कर नोट बदलने के लिए लाइनों में लगे हुए है। ताकि वे गेहूं बिजाई, खाद व अन्य लेनदेन के कार्य कर सके।
मजदूर रहमती, बाला, कृष्णा, गुरनाम, जसमेर, लीला, जगीर आदि ने कहा कि जिसके यहां पर वे मजदूरी करते हैं वह उन्हें नए नोट न होने का बहाना लगा कर पुराने नोट थमा देता है। जिसके चलते हुए एक दिन कमाई कर दूसरे दिन बैंक में नोट बदलवाने के लिए जाना पड़ता है। जिसका असर उनकी मजदूरी पर पड़ता है। मजदूरों ने सरकार के इस फैसले से उन्हें हो रही दिक्कत के चलते गलत करार दिया।
किसान बलदेव राज, बलजीत थांदडो, अनवर खान, प्रकाश थिंद, प्रदीप सैनी आदि ने बताया कि नोटबंदी सो पहले सरकार को पूरी तरह तैयारी कर लेनी चाहिए थी। आधी अधूरी तैयारी के साथ लिए गए सरकार के इस फैसले का असर उनकी खेती बाडी पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में अब गेहूं सिंचाई का कार्य पूरा हो चुका है जिसके पश्चात अब गेहूं के खेत में खरपतवार नाशक व खाद डालने का समय है, लेकिन सहकारी बैंकों में पुरानी करेंसी बंद होने के कारण वे अपनी कर्ज का लेनदेन नहीं कर सके तथा बाजार से भी पैसे के अभाव के चलते वे सामान नहीं खरीद सकते। किसानों ने मांग की है कि उनकी समस्या को देखते हुए सहकारी बैंकों में पुरानी करंसी ली जाए।
आढ़ती पहलाद भगत शर्मा, महिंद्र थांदडो, अनिल कुमार, टोनी कंसल, तरसेम कुमार, दर्शन लाल, बलदेव शर्मा आदि ने कहा कि नोटबंदी के बाद सरकार ने आढ़तियों को करंट अकाउंट से एक सप्ताह में 50 हजार रुपये की लिमिट जो तय की है वह काफी नहीं है। इसके चलते उन्हें खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आढ़तियों को सप्ताह में कम से कम 2 लाख रुपये की राशि निकालने की अनुमति देनी चाहिए।