भारतीय संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और उत्थान को लेकर क्षेत्रीय, प्रांतीय संयोजकों की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शनिवार को विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान में शुरू हुई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र नई दिल्ली के निदेशक गिरीश जोशी थे। अध्यक्षता विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के राष्ट्रीय मंत्री शिवकुमार ने की।
जोशी ने कहा कि समृद्ध भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों पर आधारित कार्यक्रम, कार्यशाला निश्चित रूप से सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं को समझने में सहायक होंगे।
उन्होंने देशभर में कराई जाने वाली सांस्कृतिक कार्यशालाओं से संबंधित संस्कृति मंत्रालय की अपेक्षाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्कृति एक अवधारणा है, उसे शब्दों में नहीं बांधा जा सकता।
उन्होंने संस्कृति मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे सांस्कृतिक मानचित्रण कार्यक्रम के शुरू होने पर कहा कि इसमें भारत के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले कलाकारों, शिल्पकारों, नृत्य या अन्य किसी भी सांस्कृतिक विधा से जुड़े व्यक्ति को अपना विवरण सांस्कृतिक मानचित्रण में दर्ज करवाना चाहिए। उन्होंने संस्कृति विभाग एवं सीसीआरटी (सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण) की रूपरेखा रखी और उसके क्रियाकलापों के बारे में बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के राष्ट्रीय मंत्री शिवकुमार ने कहा कि हम समाज के ऊपर अविलंबित रहते हुए, समाज के सहयोग से सभी प्रकार की गतिविधियां करने पर विश्वास करते हैं।
इस अवसर पर विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के उपाध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह रावल, कोषाध्यक्ष जैनपाल जैन, संस्थान के शोध निदेशक डॉ. हिम्मत सिंह सिन्हा, विद्या भारती उत्तर क्षेत्र के संगठन मंत्री हेमचंद्र, यूआईईटी में सीनियर प्रोफेसर सीसी त्रिपाठी, डॉ. आर ऋषि आदि मौजूद रहे।
देशभर के 250 जिला केंद्रों पर होंगी कार्यशालाएं
विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के निदेशक डॉ. रामेंद्र सिंह ने कहा कि देशभर के 250 जिला केंद्रों पर ये कार्यशालाएं आयोजित होंगी। विद्या भारती ने बालकों की पंचकोशीय विकास की परंपरा के लिए पांच तरह के आधारभूत विषयों का चयन किया है।
विभिन्न प्रांतों में जो वहां का पाठ्यक्रम होता है, उसके साथ-साथ शारीरिक शिक्षा, संगीत शिक्षा, नैतिक एवं आध्यात्मिक, संस्कृत शिक्षा एवं योग शिक्षा ऐसे पांच आधारभूत विषयों को लेकर विशेष प्रयास किए हैं।