सन्निहित सरोवर के तट पर स्थित श्री दुख भंजन महादेव मंदिर सभी दुखों को हरने वाला है। संधि विच्छेद करने पर भी दुखभंजन मंदिर का अर्थ बनता है दुखों को नष्ट करने वाला। भगवान शिव के प्रिय श्रावण मास में यहां शीश नवाने वाले श्रद्धालु को विशेष फल की प्राप्ति होती है। कांवड़ लेकर कुरुक्षेत्र से गुजरने वाले प्रत्येक कांवड़िया बिना यहां शीश नवाए आगे नहीं बढ़ते। कावड़ियों के लिए हर वर्ष यहां मंदिर में विशेष तौर पर प्रबंध किए जाते हैं।
महाभारत युद्ध से पूर्व पांडवों ने सन्निहित सरोवर तट पर इस मंदिर में भगवान शिव की विशेष पूजा की थी। इस मंदिर का बेहद प्राचीन एवं गौरवमयी इतिहास का उल्लेख विभिन्न धार्मिक पुस्तकों में मिलता है। उल्लेख है कि जब युद्ध में पांडवों को अपने ही सगे संबंधियों से लड़ना पड़ा था तब वे बिल्कुल टूट गए थे। भगवान शिव हर दुखों को नष्ट करने वाले हैं और उन्होंने पांडवों के भी सभी दुखों को हर लिया। महाभारत युद्ध में पांडवों की जीत हुई और कौरव मारे गए। पांडवों ने युद्ध में मारे गए परिजनों की गति इसी मंदिर के तट पर की गई थी।
पंडित सुशील शास्त्री ने बताया कि महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में 26 फरवरी को भोले की बारात निकाली जाएगी। उससे पहले 24 को संगीत व 25 को हल्दी की रस्म निभाई जाएगी। शिवरात्रि को लेकर बाकी सब तैयारियां भी जोरों पर हैं। पंडित सुशील ने कहा कि मंदिर में उन्होंने कई भक्तों के दुख दर्द दूर होते देखे हैं।
श्रद्धालु पंकज ने कहा कि उनकी आस्था काफी समय से मंदिर के साथ जुड़ी है। जब भी भगवान शिव से कुछ मांगा है उन्होंने मेरी हर इच्छा पूरी की है। इस मंदिर में सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने वाले भक्त की हर मनोकामना पूर्ण होती है।