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माताओं ने अहोई अष्टमी पर रखा निर्जला उपवास

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अपनी संतान की लंबी आयु के लिए माताओं ने पूरे दिन निर्जला उपवास रख अहोई अष्टमी पर्व मनाया। अहोई अष्टमी के दिन महिलाओं ने सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत होकर व्रत का संकल्प लिया और अपनी संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सुखी जीवन के लिए अहोई माता की पूजा अर्चना की। ऐसी मान्यता है कि अहोई अष्टमी का व्रत पुत्र की लंबी और निरोग आयु के लिए रखा जाता है, लेकिन बदलती मानसिकता ने कई परंपराओं और मान्यताओं को भी बदल दिया है। माताओं ने अपनी बेटियों के लिए भी अहोई अष्टमी का व्रत रखा। इस दिन महिलाओं ने अपने-अपने घरों में गेरू से दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाएं, जिसमें सेह और उनके सात पुत्रों को भी दर्शाया गया। इसके पश्चात माताओं ने जल से एक कलश भरकर पूजा स्थल पर रखकर चावल व रोली से अहोई माता की पूजा की। इस दौरान माताओं ने अहोई माता को मीठे पुए व हलवे का भोग लगाया। दोपहर को अपने घरों में एकत्रित होकर हाथ में गेहूं के सात दाने लेकर अहोई माता की कथा सुनी और सुनाई। व्रत रखने वाली महिलाओं ने शाम करीब छह बजे तारों की छांव में अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया।
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जिला अस्पताल की नर्सिंग ऑफिसर डिंपल बनवाला ने कहा कि सोच बदल चुकी है। उन्होंने अपनी छह वर्षीय बेटी मन्नत के लिए इस बार भी व्रत रखा। कहा कि बेटों के लिए तो सभी व्रत रखते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी की दीर्घ आयु के लिए व्रत रखा है।
सेक्टर-8 से अंजू कंसल ने अपनी तीन वर्षीय बेटी आराध्या के लिए तीसरा व्रत रखा। अंजू का कहना है कि बेटियां बेटों से किसी भी स्तर पर कम नहीं हैं। आज बेटियां हर क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रही हैं। बेटियां घर की रौनक होती है।
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बारना सीएचसी में सेवारत डॉ. सुमीता सिंह का कहना है कि बेटे और बेटियों में अंतर नहीं किया जा सकता। मेरे लिए बेटे से बढ़कर मेरी छह वर्षीय बेटी आद्या है। वह उनकी लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए हमेशा व्रत रखती हैं। शुरुआत में उन्हें भी बोला गया कि अहोई अष्टमी का व्रत पुत्र के लिए रखा जाता है, लेकिन माता-पिता अपने बच्चों में कोई भेदभाव नहीं कर सकता।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कैंपस वासी एएमओ डॉ. आरती रायत का कहना है कि बेटा और बेटी में अभी भी भेदभाव किया जा रहा है। जब वह स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में चेकअप करने जाती हैं तो कई सारी महिलाएं बेटा-बेटी में भेदभाव कराती हैं, जो सहन नहीं होता। उनके पास 12 वर्षीय बेटी जायना है, जिसकी लंबी उम्र के लिए वह हर बार अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं। कहा कि उनके लिए यही बेटा है और यही बेटी। उन्होंने दूसरा बच्चा पैदा करने की सोची भी नहीं है। इस मामले में उनका परिवार भी पूरा सहयोग कर रहा है। कहा कि धीरे-धीरे सोच बदल रही है।
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