कृषि और पर्यावरण विभाग से लेकर पूरा जिला प्रशासन फसल अवशेष न जलाने देने को लेकर कमर कसे हुए है और कड़े आदेश भी दिए गए है। लेकिन ये आदेश इन अवशेषों के धुएं में ही उड़ते दिखाई दे रहे हैं। किसान इन आदेशों को धत्ता बता धड़ल्ले से धान के अवशेष जला रहे हैं। इससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। अभी तक एक ग्राम सचिव व एक सरपंच को अवशेष जलाने को लेकर प्रशासन की कार्रवाई का शिकार भी होना पड़ा तो वहीं अब तक पर्यावरण विभाग की ओर से जिले भर के 185 किसानों पर जुर्माना लगाया जा चुका है तो उन्हें नोटिस भी थमाए गए है। इन किसानों से लगभग साढ़े तीन लाख रुपये से भी ज्यादा जुर्माना भी वसूला जा चुका जा चुका है, इसके बावजूद विभाग किसानों को अवशेष जलाने से रोक नहीं पा रहा है।
डीसी खुद कर रही निगरानी
फसलों के अवशेष जलाने पर प्रतिबंध लगाने के लिए जहां डीसी सुमेधा कटारिया ने आदेश जारी किए हुए है वहीं वे खुद भी इस मामले पर निगरानी बनाए हुए है। उन्होंने ही पिहोवा क्षेत्र में दौरा करते हुए अवशेष जलाने को लेकर ग्राम सचिव व सरपंच पर कार्रवाई भी की और दूसरे किसानों व अधिकारियों एवं सरपंचों को कड़े आदेश भी दिए।
वीरवार को 13 किसानों पर किया गया जुर्माना
पर्यावरण विभाग द्वारा कृषि विभाग के साथ मिलकर फसल अवशेष जलाने को लेकर किसानों को निशाने पर लिया। 13 किसानों पर कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाया गया। इन किसानों में गांव सारसा निवासी बलवंत, ध्यांगला निवासी रणधीर, धर्मपाल, रामपाल व रामनाथ, बदरपुर निवासी रणधीर, कल्याणा निवासी राजकुमार, जगीर सिंह, कर्म सिंह, झांसा निवासी विक्रम, संतोखपुरा निवासी बलकार व कनिपला निवासी सुखदेव एवं रणपाल शामिल है।
कार्रवाई के साथ-साथ किसानों को कर रहे जागरूक : कर्मचंद
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद का कहना है कि फसल अवशेष न जलाने को लेकर कड़े आदेश दिए हुए है, इसके बावजूद किसान मनमानी करने में लगे हैं। जहां अनेक आरोपी किसानों पर अभी तक जुर्माना लगाया जा चुका है वहीं किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। वीरवार को भी पिहोवा में ब्लॉक स्तरीय शिविर लगाया गया, जिसमें किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान व इसके न जलाने पर होने वाले फायदे से अवगत करवाया गया। इसके अलावा भी विभाग के अधिकारी किसानों को अपने-अपने स्तर पर जागरूक करने में लगे हैं।