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Kurukshetra: पूर्व राष्ट्रपति मां भद्रकाली शक्तिपीठ पहुंचे, घोड़े चढ़ाने की 5 हजार साल पुरानी परंपरा निभाई

Fri, 11 Aug 2023 01:00 PM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)

सार

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और हिमाचल के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ला परिवार सहित कुरुक्षेत्र पहुंचे। इस दौरान पूर्व राष्ट्रपति बावन शक्तिपीठों में से एक धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर में मां भगवती के चरणों में नतमस्तक हुए।
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पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बावन शक्तिपीठों में एक धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और हिमाचल के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ला परिवार सहित मां भगवती के चरणों में नतमस्तक हुए। सर्वप्रथम शक्तिपीठ के पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा, अध्यक्ष नरेंद्र वालिया, स्नेहिल शर्मा एवं सदस्यों ने पूर्व राष्ट्रपति एवं हिमाचल के राज्यपाल सहित परिवार के सदस्यों का शक्तिस्थल श्रीदेवीकूप पहुंचने पर स्वागत किया गया।

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इस अवसर पर पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने शक्तिपीठ के पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व से अवगत कराते हुए मंत्रोचारण के साथ पूजा कराई एवं पूर्व राष्ट्रपति को चांदी का मुकुट, माता की लाल शक्ति चुनरी व पुष्प माला से आशीर्वाद दिया। पीठाध्यक्ष ने पूर्व राष्ट्रपति को घर में स्थापित करने के लिए मां भद्रकाली की अष्टभुजाधारी अष्टधातु की मूर्ति भी भेंट की। पूर्व राष्ट्रपति ने शक्तिपीठ में प्रदान किए गए चांदी के मुकुट को मां भगवती के चरणों में अप्रित कर दिया।

इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने अपनी धर्मपत्नी सविता कोविंद व पुत्री स्वाति कोविंद, राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला, धर्मपत्नी जानकी शुक्ला सहित मुख्य दरबार में गर्भगृह में मां भद्रकाली जी का आहवान कर षोडशोपचार मन्त्रों के साथ मां का भाव-भक्तिपूर्ण पूजन किया। इन्होंने पान, सुपारी, ध्वजा व पंचामृत अर्पित किया व विशेष लाल पुष्पों की माला भी मां भद्रकाली जी को भेंट की।
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पूर्व राष्ट्रपति ने मां को दूध, दही, घी, शहद, गंगा जल से पंचामृत स्नान पश्चात पन्चमेवे व बहुफलों का भोग भी समर्पित किया। मां भद्रकाली जी के दरबार में विशेष नव दुर्गा पूजन भी किया गया। तत्पश्चात्त पंचदीप पात्र से भव्य आरती कर मां के गर्भ गृह की परिक्रमा की गई। उनके साथ आए अतिथियों ने भी मां को लाल-चुनरी, लाल वस्त्र, सिंदूर व नारियल पुष्पांजलि चढ़ाई।

इसके बाद पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा के सानिध्य में पूर्व राष्ट्रपति एवं हिमाचल के राज्यपाल ने मंदिर परिक्रमा की और महालक्ष्मी मंदिर में लक्ष्मी यंत्र एवं महासरस्वती मंदिर में सरस्वती यंत्र की विधिवत पूजा की ।पूर्व राष्ट्रपति ने रामनाथ कोविंद ने कहा कि वे मां भद्रकाली जी के दरबार में सभी भारतीयों की सुख शांति, सुरक्षा व भारत की उन्नति के लिए मां से प्रार्थना करने आए हैं। 

पूर्व राष्ट्रपति ने मां के दरबार के बारे में अपने सुखद अनुभव के बारे में कहा कि मां भद्रकाली शक्तिपीठ में उनको अत्यंत ही दिव्य आनंद की अनुभूति हुई। हरियाणा के एकमात्र शक्तिपीठ मां भद्रकाली शक्तिपीठ में दर्शन कर उन्हें ऐसा अनुभव हुआ जैसे मां ने उन्हें साक्षात आशीर्वाद दिया। पूर्व राष्ट्रपति ने मंदिर विज़िटर बुक में मंदिर व्यवस्था, अनुभव और शक्तिपीठ परिसर की दिव्यता को साझा करते हुए पीठाध्यक्ष को बधाई दी।
 
पीठाध्यक्ष ने उन्हें प्रसाद व मां भद्रकाली का चित्र भेंट किया और उन्हें मंदिर में चल रहे निर्माण जैसे शनि मंदिर इत्यादि के बारे में भी बताया। प्रत्येक वर्ष होने वाले भव्य नवरात्रि महोत्सव की भी जानकारी दी गयी, जिसके लिए रामनाथ कोविंद ने पीठाध्यक्ष को बधाई दी और कहा कि उन्होंने भी मंदिर के विशाल व व्यवस्थित कार्यक्रमों की बहुत प्रशंसा सुनी है। उन्होंने विजिटर बुक में भी मंदिर के वातावरण को मनमोहक व पूजा को श्रेष्ठ बताया। अंत में उनके साथ आए सभी ने दी लैंडमार्क आई लव कुरुक्षेत्र के साथ ग्रुप फोटो खिंचवाया। 

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अब कर्तव्य की परीक्षा में भी सफल होने वाले संकल्प: मनोहर लाल

छात्र छात्राओं के लिए दीक्षांत समारोह में डिग्री लेना बड़े हर्ष और गौरव की बात होती है यह दिन पढ़ाई के क्षेत्र में उनकी सफलता का दिन होता है लेकिन अभी उन्हें कर्तव्य की परीक्षा में भी सफल होना है इसके लिए उन्हें संकल्प लेकर सेवा भाव से जनता के बीच जाना होगा। यह आह्वान मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किया वह केयू के दीक्षांत समारोह में छात्र छात्राओं को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि उन्हें भी जापानी भाषा में पढ़ाई करने पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया जिससे उन्हें बेहद खुशी है मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अन्य भाषाएं जरूर सीखनी चाहिए भाषाओं से आपसी संबंध व प्रेम बढ़ता है तो ज्ञान में भी वृद्धि होती हैं हम अपने ही राज्य में नहीं बल्कि पूरे देश में विदेशों में भी भाषाओं के बल पर अपने आप को प्रस्तुत कर सकते हैं सामने वाले व्यक्ति को भी आसानी से समझा जा सकता है और दोनों और से निकटता बढ़ती है सभी विद्यार्थियों को विभिन्न भाषाओं का ज्ञान लेना चाहिए।
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