पिहोवा। करीब 50 एकड़ पंचायती भूमि की खुली बोली के दौरान पुलिस बल की मौजूदगी में एक पंच सहित करीब 16 लोगों ने सरकारी रिकार्ड फाड़ने के साथ बीडीपीओ से मारपीट की। जैसे-तैसे पुलिस और ग्रामीणों ने बीडीपीओ को हमलावरों के चंगुल से छुड़वाया। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस ने बीडीपीओ राजेश कुमार की शिकायत पर 12 लोगों को नामजद किया है, जबकि अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भी विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
अमर उजाला से बातचीत में खुद बीडीपीओ ने गांव बाखली कलां के पंच सिकंदर और उसके साथियों द्वारा मारपीट की पुष्टि करते हुए बताया कि उनकी आंख के पास चोट के अलावा शरीर पर कई जगह गुम चोटें लगी है, अगर मौके पर तैनात पुलिस और पंचायती भूमि की बोली प्रक्रिया में शामिल होने आए ग्रामीण उन्हें न छुड़वाते तो यहां बड़ा घटनाक्रम हो सकता था। बहरहाल इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर कानून व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। बताया गया है कि शनिवार को पिहोवा के बीडीपीओ कार्यालय में गांव बाखली खुर्द की पंचायती भूमि की खुली बोली थी, लेकिन इस दौरान बाखली कलां के कुछ लोगों ने बोली को लेकर हंगामा किया। बोली के दौरान कुछ लोगों ने बीडीपीओ को निशाना बनाते हुए उनके साथ मारपीट भी की। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस ने बीडीपीओ की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 12 लोगों को नामजद करते उनके कई अन्य साथियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। वहीं जानकारी यह भी मिली है कि पुलिस ने पांच लोगों को हिरासत में लिया है। बीडीपीओ राजेश कुमार के अनुसार शनिवार को ग्राम सचिव व सरकारी कर्मचारियों की मौजूदगी में बीडीपीओ कार्यालय के बहुउद्देशीय हॉल में गांव बाखली खुर्द की करीब 50 एकड़ पंचायती भूमि की खुली बोली चल रही थी। उसी समय गांव बाखली कलां के कई लोग हाल में घुसकर शोर करने लगे। कुछ देर के बाद इन लोगों ने पंचायती रिकॉर्ड को फाड़ना शुरू कर दिया। जिसका विरोध करने पर इन लोगों ने उस पर हमला बोल दिया और मारपीट करनी शुरू कर दी। पास बैठे अन्य कर्मचारियों ने किसी तरह से उनके चंगुल से छुड़वाया। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए 12 लोगों को नामजद करते हुए उनके अन्य कई साथियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कुछ ग्रामीणों ने किया बोली का विरोध
बोली का विरोध कर रहे लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा कि गांव की पंचायती भूमि की बोली अवैध तरीके से करवाई गई है। बोली से पूर्व बोली के नियम व शर्तों का पालन नहीं किया है। आरोप है कि बोली से पहले इसकी कोई सूचना उन्हें नहीं दी गई और न ही गांव में कोई मुनादी कराई गई।
छुट्टी वाले दिन बोली
छुट्टी के दिन बोली कराने पर सवाल उठाये जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायती भूमि की खुली बोली छुट्टी वाले दिन कराई है। इन्होंने मांग की है कि शनिवार को की गई पंचायती भूमि की बोली को रद किया जाए और बोली प्रक्रिया दोबारा से करवाई जाए।
सभी को सूचना भी दी, मुनादी भी कराई : बीडीपीओ
बीडीपीओ राजेश कुमार ने बताया कि बोली से पहले ग्राम सरपंच ने गांव में सभी को सूचना दी थी और मुनादी भी करवाई थी। लेकिन गांव के कुछ लोग बोली के विरोध में थे, जो कि बोली नहीं होने देना चाहते थे। बोली से एक दिन पहले ही कुछ लोगों ने बोली रद कराने को लेकर उनसे मिले भी थे, क्योंकि बोली का संदेश सभी को दिया जा चुका था, इसलिये शनिवार को बाली प्रक्रिया शुरू की गई थी।