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मंत्री के सामने फूट फूटकर रोए

Sun, 04 Oct 2015 12:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कुरुक्षेत्र
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हरियाणा के कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने शनिवार को लाडवा और शाहाबाद अनाज मंडी का औचक निरीक्षण कर किसानों की समस्याएं सुनीं।
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कृषि मंत्री ने मंडी में पड़े धान और एजेंसियों द्वारा खरीदे गए धान की बोरियों को धर्मकांटे पर तौल कर वजन जांच की। कृषि मंत्री ने खरीद एजेंसियों के अधिकारियों को तलब कर, उन्हें तेजी से खरीद करने के आदेश दिए।

कृषि मंत्री ओपी  धनखड़ ने लाडवा में किसानों से हकीकत जाननी चाहिए, तो वे रो पड़े। अधिकांश का कहना था कि शैलर मालिक किसानों को लूट रहे हैं।

कृषि मंत्री शनिवार को दोपहर में कुरुक्षेत्र पहुंचे। यहां उन्होंने अग्रवाल धर्मशाला में चल रहे चंडीगढ़ के भाजपा कार्यकर्ताओं की कार्यशाला में संबोधित किया। इसके बाद वे पुराने बस अड्डा पर स्थित राजकीय पशु अस्पताल पहुंचे और उसकी हालत देखी।
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इसके बाद उन्होंने माना कि इस अस्पताल का जीर्णोद्धार जरूरी है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जल्द से जल्द इसका एस्टीमेट बनाकर उन्हें भेजें। इसके पश्चात वे लाडवा अनाज मंडी पहुंच गए।

इस अवसर पर उनके साथ भाजपा जिलाध्यक्ष  धुम्मन सिंह किरमिच, डा. गणेश दत्त, गुरदेव मेहरा, एसडीएम थानेसर सतबीर  सिंह कुंडू, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कंवरभान नरवाल, मार्केट कमेटी  सचिव जसबीर सिंह, थानाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार, मंडी अध्यक्ष अशोक गुप्ता, राकेश खुराना, विकास सिंघल आदि उपस्थित रहे।

200 रुपये कम में खरीद रहे धान
लाडवा अनाज मंडी में किसानों से धान की खरीद को लेकर बात की तो किसान रो पड़े। उन्होंने कृषि मंत्री के सामने अपनी फसल को लूटे जाने की शिकायत करते हुए कहा कि शैलर मालिक उनकी धान को समर्थन मूल्य से दो सौ रुपये तक कम खरीद रहे हैं।

इस पर कृषि मंत्री ने लाडवा में खरीद कर रहे तीनों एजेंसियों के अधिकारियों को मौके पर बुलाया और किसान के धान न खरीदने के आरोप का जवाब देने को कहा।

शाहाबाद में भी कुछ किसानों ने कृषि मंत्री को खरी-खरी सुनाई। अधिकारियों द्वारा फसल में कटौती किए जाने की भी शिकायत की। इसके बाद मंत्री ने परेशान करने वाले आढ़तियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

अधिकारियों को लगाई जमकर लताड़
खाद्य आपूर्ति विभाग के एक अधिकारी से किसानों के आरोपों का कोई जवाब देते नहीं बना। इस पर कृषि मंत्री उखड़ गए और अधिकारियों को जमकर लताड़ा।

उन्होंने सभी अधिकारियों को किसानों का धान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने के आदेश दिए। उन्होंने लाडवा के विधायक डॉ. पवन सैनी से कहा कि वे समय-समय पर मंडी का दौरा करें और किसानों की समस्याओं को जानकर उनका अधिकारियों से समाधान भी करवाएं।

मंत्री के जाते ही पुराने ढर्रे पर हुई खरीद
कृषि मंत्री का लाडवा अनाज मंडी का औचक निरीक्षण किसानों के लिए फलदायी साबित नहीं हुआ। कृषि मंत्री के मंडी से जाते ही खरीद एजेंसियों के अधिकारी अपने पुराने ढर्रे पर चल पड़े।

किसान धान खरीद के कस्टम मिलर्स के रहमोकरम के हवाले हो गए। धान की सरकारी खरीद शुरू हुई, लेकिन किसानों को अपने धान के कम दाम ही मिले।

कृषि मंत्री के निरीक्षण के बाद किसानों को उम्मीद थी कि अब उनके धान का सही मूल्य उन्हें मिल जाएगा और समय पर धान बिक भी जाएगा। कृषि मंत्री के मंडी  से  जाते ही किसानों की 17 प्रतिशत नमी वाली धान भी समर्थन मूल्य से कम पर  खरीदी गई।  

खरीद व्यवस्था में करें सुधार
कृषि  मंत्री ने कहा कि किसान का धान सरकार खरीद कर राईस मिलर्स को देती है और  किसानों को अपना धान समर्थन मूल्य से कम पर नहीं बेचना चाहिए।

इस पर पत्रकारों ने मंत्री को बताया कि लाडवा में धान की सरकारी खरीद एजेंसी के  अधिकारी नहीं करते, बल्कि राईस मिलर्स व कस्टम मिलर्स अपनी शर्तों पर  खरीदते हैं। इस पर मंत्री ने अधिकारियों को कहा कि लाडवा में खरीद व्यवस्था  में तुरंत सुधार किया जाए।  

अधिकारियों और सरकार की पैरवी मंहगी पड़ी
मंडी में भाजपा के किसान सेल के पदाधिकारी गुरदयाल कड़ामी को सरकारी अधिकारियों और सरकार के पक्ष में बढ़-बढ़ कर बोलना उस समय मंहगा पड़ा, जब किसान कृषि मंत्री के सामने ही उन नेता जी पर बरस पड़े।

किसानों ने कहा कि दफ्तरों में बैठकर किसानों की समस्याओं का हल नहीं निकलता, उसके लिए बाहर निकलना पड़ता है। इस पर नेता जी ने मौके से खिसकने में ही भलाई समझी।

मंत्री से पूछ बैठे, आप कौन
शाहाबाद अनाज मंडी का दौरा करने कृषि मंत्री ओपी धनखड़ पहुंचे तो उन्होंने अपना काफिला पहले ही छोड़ दिया। वे सीधे किसानों के पास पहुंच गए। इसी दौरान दो किसान ट्रॉली के पास खड़े थे।
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मंत्री ने उनसे जाकर मंडी के हाल के बारे में जानकारी हासिल करनी चाहिए, तो उन्होंने पहले तो सब ठीक कहा। उसके धनखड़ से ही पूछ लिया कि आप कौन हैं। इस पर धनखड़ ने उन्हें बताया कि वे कृषि मंत्री हैं। इसके बाद धनखड़ वहां से निकल कर चारपाई पर बैठे किसानों के बीच जाकर बैठ गए। उनसे भी वहां के हालात के बारे में जानकारी हासिल की।
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