कुरुक्षेत्र। भट्ठों पर बने टीन की छत वाले कच्चे मकानों की नंबरिंग करते शिक्षक। संवाद
कुरुक्षेत्र। जनगणना कार्य में जुटे शिक्षक इन दिनों गांवों की गलियों से लेकर खेतों की पगडंडियां तक नापने को मजबूर हैं।
घर-घर जाकर नंबरिंग और डाटा जुटाने के काम में कर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में अभी तक नंबरिंग पूरी नहीं हो पाई है। अब शिक्षकों को खेतों के बीच बनी कच्ची पगडंडियों से गुजरते हुए ट्यूबवेलों के पास बनी झोपड़ियों और अस्थायी कमरों तक पहुंचना पड़ रहा है।
खेतों में सीजन के दौरान रहने वाले प्रवासी मजदूरों की गणना शिक्षकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। कहीं कच्ची ईंटों और लोहे की टीन से बने अस्थायी मकान हैं तो कहीं खेतों के बीच बने छोटे कमरों में मजदूर परिवार रह रहे हैं। जनगणना कर्मी इन सभी स्थानों तक पहुंचकर नंबरिंग करने और जानकारी जुटाने में लगे हैं। दोपहर के समय लोगों का दरवाजे न खोलना भी परेशानी बढ़ा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि शहरों में लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं।
कुरुक्षेत्र। भट्ठों पर बने टीन की छत वाले कच्चे मकानों की नंबरिंग करते शिक्षक। संवाद