वेशभूषा से कलाकारों ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
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ज्योतिसर गांव में अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के अंतर्गत उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र पटियाला के कलाकारों ने समां बांध दिया। कार्यक्रम की शुरूआत में देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने अपनी-अपनी वेश-भूषा में कार्यक्रम प्रस्तुत किया। मणिपुर प्रदेश के कलाकारों की रास लीला का नृत्य प्रस्तुत किया गया। जिसमें मधुर बांस, घंटी, टाली, मंजीरे व ढोलक की थाप पर संगीत के माध्यम से वहां की संस्कृति को दर्शाते हुए भव्य नृत्य की प्रस्तुती देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर लिया।
वहीं राजस्थान के सपेरा जाति से आएं कलाकारों ने वहां की संस्कृति को दर्शाते हुए उन्हें अपना काल बेलिया नृत्य प्रस्तुत किया जहां दर्शकों ने बड़ा सराहा। क्षेत्रिय बोरताल पर आधारित असाम का नृत्य बहुत ही सुंदर वेश-भूषा में सुशोभित कलाकारों ने असाम की संस्कृति से जुड़ी कला को दिखाकर सबको मोहित किया। इसी प्रकार घसीयारी नृत्य उत्तराखंड के कलाकारों ने वहां की वेश-भूषा में टोकरी लिए हुए अपना नृत्य दिखाकर सबका मनोरंजन किया।
इसके अलावा हिमाचल प्रदेश की हसीन वादियों की पहाड़ियों से आएं कलाकारों ने वहां की विवाह, शादियों में जो अक्सर प्रस्तुत किया जाता है कलाकारों ने गिद्दे से यहां के लोगों का भरपूर मनोरंजन करवाया। इस मौके पर गांव की सरपंच वीणा देवी, पंच निशा जिंदल, राज रानी, हसं राज, संजीव, गांव के गणमान्य व्यक्ति सहित काफी तदाद में बच्चें, लोग मौजूद थे।