दक्षिण भारत में फिल्म पांडव वनवासम् से 1961 में कैरियर की शुरुआत कर मथुरा सीट से सांसद बनने तक हेमा मालिनी ने कई बुलंदियों को छुआ है। 68 की उम्र के बाद भी उनके हुनर का जादू आज भी बरकरार है। ये उनकी अदा, अंदाज और असर का ही नतीजा है कि अभी तक बॉलीवुड में उनके बाद दूसरी ड्रीम गर्ल का खिताब किसी को नहीं मिल सका। कुरुक्षेत्र पहुंचीं हेमा मालिनी से अमर उजाला ने खास बातचीत की।
नॉर्थ जोन कल्चर सेंटर भारत सरकार के बुलावे पर हेमा मालिनी कुरुक्षेत्र में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किए जा रहे गीता जयंती महोत्सव के अवसर पर द्रौपदी नृत्य की प्रस्तुति करने के लिए पहुंची थीं। यह संयोग ही था कि उनका यह नृत्य कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर पर स्थित महाभारत कालीन द्रौपदी कूप के ठीक सामने मंच पर हुआ। बातचीत में हेमा मालिनी ने कहा कि मैं नारी वेदना को समझती हूं। द्रौपदी नृत्य में यही सार है। इसमें द्रौपदी के रूप में आधुनिक नारियों के संघर्ष, चुनौतियों और दर्द को उजागर करता है। उम्र के इस पड़ाव में तमाम व्यस्तताओं के चलते देख फिल्मों में अभिनय,नृत्य और राजनीति के अलावा सामाजिक कार्यों का सामंजस्य बनाने में निपुण हेमा मालिनी ने बताया कि वह कुरुक्षेत्र में दिए कर्म के संदेश में विश्वास रखती हैं।
जहां कर्म करने का यही जुनून उन्हें सभी क्षेत्रों में सक्रिय रखता है,वहीं योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के इस संदेश के अलावा योग उन्हें काम करने की पूरी स्फूर्ति और ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि हर कार्य के लिए अलग समय होता है। फिल्मों से लंबी दूरी के बाद प्रशंसकों को अभिनेत्री हेमा मालिनी की अगली फिल्म कब देखने को मिलेगी, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि सुपरहिट फिल्म बागबान के बाद उनकी अगली फिल्म राजमाता विजयाराजे सिंधिया के जीवन पर आधारित है। इस फिल्म का टाइटल नेम होगा एक थी रानी ऐसी भी...। हालांकि हेमा मालिनी के अहम किरदार वाली यह फिल्म 2013 में रिलीज डेट के बावजूद अटकी हुई है।
हेमा मालिनी के मुताबिक फिल्म निर्देशक रमेश सिप्पी की फिल्म शिमला मिर्च के जरिये वह जल्द अपने प्रशंसकों के बीच होंगी। सिप्पी के साथ हेमा मालिनी सबसे पहले अंदाज और भारतीय इतिहास की सफलतम फिल्म शोले के बाद सीता और गीता में काम कर चुकी हैं। रोमांटिक कामेडी फिल्म शिमला मिर्च में राज कुमार राव मेन किरदार होंगे। यहां बताना लाजिमी है कि इस फिल्म में कार्य के लिए उन्होंने बाकायदा सांसद पद की जिम्मेदारी से अवकाश लिया है।
यहां आने का अवसर मिला यह सौभाग्य
मंच पर परफॉरमेंस से पहले बातचीत में हेमा मालिनी ने इस बात पर संतोष जताया कि आज उन्हें उस पवित्र भूमि पर द्रौपदी नृत्य करने का सौभाग्य केंद्र सरकार के कारण मिला है, जिस रणभूमि में पांच हजार साल पहले नारी के अपमान का बदला लिया गया था। हेमा मालिनी ने कहा कि भक्ति की महिमा को नकारा नहीं जा सकता। सच्चे मन से भक्ति की बदौलत ही द्रौपदी की लाज रखने के लिए भगवान श्रीकृष्ण को खुद आना पड़ा था।