संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग की ओर से आयोजित पांच दिवसीय नाट्य उत्सव के चौथे दिन लाखा लहरी की ओर से निर्देशित एवं कृपाल कजाक लिखित ‘तलाक’ नाटक वैवाहिक संबंधों की जटिलता को उजागर कर गया। नाटक में मानवीय रिश्तों एवं रिश्तों के प्रति बढ़ती इच्छाओं को वर्तमान परिस्थितियों के साथ जोड़कर जीवन की असलियत की पोल खोली गई।
नाटक एक अनाथ युवक गुरिंदर सिंह के इर्दगिर्द घूमता है। वह कॉलेज टाइम की खूबसूरत लड़की त्रिखा से शादी करना चाहता है, लेकिन बदलते हालात में उसकी शादी एक अनाथ लड़की से हो जाती है। इस बीच त्रिखा का अपने पति से तलाक हो जाता है और युवक त्वचा रोग के बहाने अपनी पत्नी को तलाक देने का फैसला करता है। नाटक की कहानी कई मोड़ से गुजरती है और अंत में गुरिंदर सिंह अपनी पत्नी को तलाक देने के अपने फैसले को उलट देता है। इस प्रकार नाटक वैवाहिक संबंधों की जटिलता ओर प्रेम प्रसंग को दर्शाता है।
मुख्यातिथि मदन मोहन छाबड़ा मानद सचिव कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने 13 साल बाद नाट्य उत्सव की फिर से शुरुआत कर एक बेहतरीन प्रयास किया है। इस अवसर पर उनकी पत्नी डॉ. ज्योति छाबड़ा भी उपस्थित रही। विशिष्ट अतिथि के रूप में अंबेडकर अध्ययन केंद्र के सह निदेशक डॉ. प्रीतम सिंह ने कहा कि तलाक नाटक वर्तमान जिंदगी के कड़वे सच को उजागर कर गया।
विभाग की ओर से नाटक के निदेशक डॉ. लाखा लहरी तथा नाटक की पूरी टीम को युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग की ओर से सम्मानित किया गया। इस मौके पर डॉ. महावीर, डॉ. हरदीप जोशी, प्रो. शुचिस्मिता, प्रो. सुनील ढीगड़ा, प्रो. परमेश, डॉ. अशोक शर्मा, डॉ. संजय शर्मा, डॉ. रमेश ढांडा, डॉ. सुमन ढांडा, डॉ. गुरचरण, डॉ. दीपक राय बब्बर, डॉ. ज्ञान चहल, डॉ. रामनिवास सहित उपस्थित रहे।
नाटक में अभिनय करते कलाकार। संवाद- फोटो : Kurukshetra