कुरुक्षेत्र। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएनएल) बनाम भारती इंफ्राटेल लिमिटेड के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार की अदालत ने फैसला सुनाया। इसमें स्पष्ट किया कि बिजली चोरी या अनधिकृत उपयोग के आकलन व कंपाउंडिंग से जुड़े मामलों में दीवानी अदालत का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।
भारती इंफ्राटेल का पिहोवा में एक मोबाइल टावर था जिसका बिजली कनेक्शन यूएचबीवीएनएल से था। फरवरी 2017 में मीटर जल गया था। 3 मार्च 2017 को निगम ने पुराना मीटर हटाकर नया मीटर लगा दिया। इसके बावजूद निगम ने सितंबर 2017 में 5,42,268 रुपये का चोरी का आकलन कर और एक लाख रुपये कंपाउंडिंग शुल्क का नोटिस जारी कर बिजली काट दी। भारती इंफ्राटेल ने दीवानी अदालत सिविल जज जूनियर डिवीजन पिहोवा में मुकदमा दायर किया। 13 दिसंबर 2022 को निचली अदालत ने कंपनी के पक्ष में फैसला देते हुए नोटिस रद्द कर बिजली बहाल करने का आदेश दिया था। निगम इस फैसले के खिलाफ अपील लेकर अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत में पहुंचा।
अदालत ने हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 145 स्पष्ट रूप से दीवानी अदालत के अधिकार क्षेत्र को प्रतिबंधित करती है। बिजली चोरी, अनधिकृत उपयोग या कंपाउंडिंग से जुड़े किसी भी विवाद को केवल विद्युत अधिनियम के अंतर्गत ही चुनौती दी जा सकती है। निचली अदालत ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर फैसला सुनाया था, जो विधि की दृष्टि से शून्य है। अदालत ने अपने आदेश में निगम की अपील को स्वीकार करते हुए सिविल जज जूनियर डिवीजन पिहोवा के 13 दिसंबर 2022 के निर्णय को निरस्त कर दिया। भारती इंफ्राटेल का मूल दीवानी मुकदमा खारिज किया गया और कंपनी को विद्युत अधिनियम के अंतर्गत विशेष न्यायालय में अपील दायर करने की छूट दी है।