तीन माह का वेतन न मिलने की वजह से आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। बतां दें कि पहले भी तीन माह का वेतन न दिए जाने के विरोध में कर्मचारियों ने हड़ताल की थी। सोमवार को अचानक से करीब 150 कर्मचारी अपना कामकाज छोड़कर धरने पर बैठ गए।
जैसे ही कर्मचारियों की हड़ताल शुरू हुई स्वास्थ्य विभाग और मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई और सफाई से लेकर ओपीडी की पर्ची काटने तक का काम प्रभावित हो गया। वहीं डाक्टरों को 15 से 20 मरीजों के ऑपरेशन स्थगित करने पड़े। इस दौरान ओपीडी की पर्ची कटवाने के लिए आए लोगों की लंबी कतारें लग गई। लोग काउंटर खुलने का इंतजार करते रहे। संख्या बढ़ती देखकर ओपीडी पर्ची काटने के लिए दो फार्मेसी ऑफिसर की ड्यूटी लगाई गई। इस दौरान मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं डाक्टर भी अपनी अपनी ओपीडी के बाहर स्वयं ही व्यवस्था बनाते नजर आए।
उप सिविल सर्जन डॉ. शैलेंद्र खांबरा ने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से बातचीत कर जल्द वेतन जारी करने का आश्वासन दिया, लेकिन कर्मचारी वेतन खातों में न आने तक हड़ताल जारी रखने पर अडिग रहे। इसके पश्चात जिला सिविल सर्जन कार्यालय में कर्मचारियों ने उपायुक्त मुकुल कुमार से मुलाकात की। इस दौरान उपायुक्त ने कर्मचारियों को सोमवार शाम तक वेतन जारी करने का आश्वासन दिया।
हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि दशहरा और करवाचौथ का पर्व निकल चुका है, लेकिन अगस्त माह से अभी तक वेतन नहीं मिला। त्योहारी सीजन में कर्मचारियों की जेब खाली है। इधर-उधर से उधार मांग कर काम चल रहे हैं। हर माह की 7 तारीख तक वेतन खातों में डालने का प्रावधान है, लेकिन जानबूझकर कई कई माह तक वेतन अटका कर रखते हैं। ऐसा नहीं है कि उन्होंने अपना दुखड़ा किसी के सामने नहीं रोया। ठेकेदार से लेकर चिकित्सा अधीक्षक, सिविल सर्जन और जिला प्रशासन तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ।
नीता ने बताया कि उसको पिछले काफी दिनों से परेशानी हो रही थी, जिसके चलते वह आज सुबह महिला रोग विशेषज्ञ को दिखाने पहुंची। यहां देखा तो कर्मचारियों की हड़ताल है। सुबह उसकी पर्ची नहीं कटी। इसी कारण वह चिकित्सक को नहीं दिखा पाई।
बच्चे को दिखाने आई महिला ने बताया कि उसके बेटे को पिछले कई दिनों से बुखार की दिक्कत है। आज अस्पताल में चिकित्सक से जांच कराने आई थी। सुबह 8 बजे से लाइन में लगी थी, लेकिन दोपहर तक भी पर्ची नहीं कटी। बताया कि बिना पर्ची के चिकित्सक ने जांच तो कर ली, लेकिन अब दवा के लिए ओपीडी पर्ची जरूरी है।
पूजा रानी ने बताया कि उसको सांस लेने में दिक्कत हो रही है, जिसके चलते वह चिकित्सक से चैकअप कराने आई थी, लेकिन आज भी पर्ची न कटी। बताया कि पिछले 4 दिनों से वह अस्पताल में आ रही थी, लेकिन पहले तो छुट्टी हो गई आज कर्मचारी हड़ताल पर चले गए।
अंजू बाला ने बताया कि पिछले कई दिनों से बुखार हो रहा है। दवा लेने के बाद ठीक हो जाता था, लेकिन अब हालत इतनी खराब हो रही है कि वह खड़ी भी नहीं हो पा रही है। काफी देर इंतजार करने के पश्चात पर्ची नहीं कटी तो नीचे जमीन पर बैठना पड़ा।
पंजाब जाखड़ से बुजुर्ग महिला शांति देवी की आंख दिखाने आई परिजनों ने बताया कि वह सुबह अस्पताल पहुंच गए थे, लेकिन यहां देखा तो कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इसकी वजह से अपने मरीज को नहीं दिखा पा रहे। पता नहीं हड़ताल कब तक चलेगी, कर्मचारियों के हड़ताल के चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उप सिविल सर्जन डॉ. अनुपमा सिंह का कहना है कि ठेकेदार को पहले कर्मचारियों का वेतन जारी करना होता है। इसके बाद ही स्वास्थ्य विभाग बजट ठेकेदार के खाते में डालता है, लेकिन हमेशा से हाजिरी और बिल सहित अन्य कई तरह के ठेकेदार के पास इश्यू होते हैं, जिस कारण कर्मचारियों को वेतन मिलने में देरी होती है। उम्मीद है कि मंगलवार तक सभी कर्मचारियों का अटका हुआ वेतन जारी हो जाएगा।