कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के टूरिज्म विभाग द्वारा हरियाणा पवेलियन में हरियाणवी खानपान की स्टॉल लगाई गई है, जिसमें की बात न हो भला कैसे हो सकता है। इसी बात को पूरा करने के लिए हरियाणवी शुद्ध, सात्विक देसी खाना खिलाने का जिम्मा उठाया गया है। दर्शक और अतिथि इसका स्वाद चख रहे हैं। डॉ. राहुल गर्ग के निर्देशन में विभाग के विद्यार्थियों द्वारा स्टाल लगाई गई है। उन्होंने बताया इस बार हरियाणवी खाने में नमकीन लस्सी, मीठी लस्सी, चटपटी चना बाकली, दही भल्ले, स्पेशल दाल मखनी, स्वादिष्ट बाजरा, रागी इडली सांभार, चोको चूरमा, कसूता चूरमा, शाही टुकड़ा जामुन और दोनों को मिलाकर एक नई स्वादिष्ट लस्सी सम्मिलित है। इसके साथ-साथ अलग से गोल-गप्पों का विशेष प्रबंध किया गया है। स्टॉल पर हरियाणवी शुद्ध, सात्विक खाना खाना आगंतुकों को अपनी ओर अधिक आकर्षित कर रहा है। डॉ. सुरेंद्र कुमार ने कहा कि हर वर्ष वे यहां रत्नावली में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने आते हैं साथ में अपने हरियाणवी खाने का भी आनंद उठाते हैं। वे कहते हैं कि प्रदेश की पहचान ही हमारा उच्च खानपान रहा है। रत्नावली समारोह का आनंद लेने करनाल से पहुंचे डॉ. प्रदीप जाखड़ ने बताया कि जब प्रदेश के खानपान की बात आती है तो सब खाने के बाद अगर आपने चूरमा नहीं खाया तो आपका स्वाद अधूरा ही रहेगा।
हरियाणवी हस्तशिल्प प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
कुरुक्षेत्र। रत्नावली महोत्सव के दूसरे दिन श्रीमद्भगवत गीता सदन में हस्तशिल्प प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र बनी, जिसमें प्रतिभागियों ने बोहिया, इंडी, पीड्ढा, फुलवारी, सांझी और बंदरवाल द्वारा हरियाणी संस्कृति को बचाने का संदेश दिया। छात्रों की भागीदारी और उत्साह ने महोत्सव की रौनक को ओर बढ़ा दिया। हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने को समर्पित रत्नावली को देखने के लिए दर्शक प्रदेश के कौने-कौने से पहुंच रहे हैं। साथ ही प्रतिभागियों में भी उत्साह नजर आ रहा है। प्रतिभागियों ने सांझी, फुलझड़ी, पदकीप बनाकर अपनी विरासत का प्रदर्शन कर रहे हैं। डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि त्योहारों का महत्व हमारे रिश्तों को मजबूत बनाने में होता है। भारतीय संस्कृति में विभिन्न त्योहारों का आयोजन केवल धार्मिक उद्देश्यों के लिए नहीं होता, बल्कि ये हमारे सामाजिक बंधनों को और भी मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके सांझी बनाने का उद्देश्य एक मां और बेटे के अनमोल रिश्ते की गहराई को उजागर करना है।
ललित कला विभाग की डॉ. जया दरोंदे की पेंटिंग बन रही है आकर्षण
कुरुक्षेत्र। पक्षियों की आजादी और महिलाओं पर पाबंदी, फूलों की खुशबू और नारी का अस्तित्व, मछली की स्वतंत्रता और नारी का बंधन विषय पर आधारित पेंटिंग राज्य स्तरीय रत्नावली महोत्सव में सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग की डॉ. जया दरोंदे ने पांच वर्ष पहले महिलाओं की समाज में क्या स्थिति है, इस थीम पर काम करना शुरू किया था। उन्होंने कहा कि भिन्न-भिन्न रंगों की पेंसिल और पेपर से उन्होंने वर्तमान समाज में महिला की स्थिति कैसी है उसे उकेरने का प्रयास किया है, जिसमें उन्होंने महिला और प्रकृति के माध्यम से इसे दिखाने का कार्य किया है। उन्होंने तीन थीम लिए हैं, जिसमें सबसे पहले पक्षी और महिला को आमने सामने दिखाया गया है। पक्षी जहां अपनी मर्जी से पूरे गगन में कहीं भी उड़ सकता है दूसरी तरफ महिलाओं पर कई तरह के बंधन होते हैं। दूसरा मछली बिना किसी बंधन के स्वतंत्र रूप से पानी में तैर सकती है। जबकि महिला कई बंधनों में बंधी होती हैं और वह पूर्ण आजादी के साथ अपना जीवन व्यतीत नहीं कर सकतीं।