कुरुक्षेत्र। जिले की अनाजमंडियों में भले ही गेहूं की आवक कम होने लगी है लेकिन उठान में कोई सुधार नहीं हो पा रहा। प्रशासन द्वारा व्यवस्था के दावे पूरी तरह से फेल साबित हो रहे हैं। अव्यवस्था के चलते सोमवार को भी करीब 35 लाख क्विंटल गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा रहा, जिस पर दिन भर बारिश का संकट मंडराता रहा। इसी बीच दोपहर के समय आढ़ती व किसानों में उस समय खलबली भी मच गई जब इस गेहूं पर तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी होने लगी। कहीं ज्यादा तो कहीं कम बूंदाबांदी हुई, लेकिन हर कोई गेहूं उठान की अव्यवस्था को हैरानी भरी नजरों से देखता रहा।
बता दें कि करीब 90 फीसदी तक गेहूं का सीजन निपट चुका है और आवक बेहद कम रह गई है। इसके बावजूद अनाजमंडियां आवक व खरीद की गई गेहूं से अटी पड़ी है। यहां तक कि अभी भी किसानों को मंडियों में गेहूं डालने के लिए जगह नहीं मिल पा रही है। मुख्य सचिव से लेकर जिला प्रशासनिक अधिकारी मंडियों का दौरा करते रहे, लेकिन पूरे सीजन के चलते उठान कार्य में कोई सुधार नहीं हो पाया। आढ़तियों की मानें तो उन्हें जिम्मा दे दिया गया, जिनके पास पर्याप्त संसाधन तक नहीं थे। अब उठान की आड़ में चार से पांच रुपये तक नजराना लिए जाने की खुली चर्चा की जाने लगी है। नाम न छापने क शर्त पर आढ़ती यह स्वीकार कर रहे हैं जबकि प्रशासन का दावा है कि नजराने की कोई शिकायत नहीं है।
बूंदाबांदी हुई तो मची खलबली
पहले तेज हवाएं और फिर बूंदाबांदी हुई तो किसान व आढ़तियों में खलबली मच गई। अनाजमंडियों में आढ़तियों की ओर से मजदूरों के जरिए गेहूं का तिरपाल से ढांपकर बारिश से बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन ये प्रसार नाकाफी साबित रहे। सभी ने उस समय राहत की सांस ली जब बूंदाबांदी के बाद मौसम साफ हो गया और धूप खिली।
कई घंटे तक ट्राली लिए खड़ा रहा, नहीं मिल जगह : रणधीर सिंह
गांव समाना बाहू से थानेसर अनाजमंडी में पहुंचे किसान रणधीर सिंह का कहना था कि वह सुबह ही गेहूं लेकर मंडी पहुंच गया था, लेकिन जगह नहीं मिली। कईं घंटे तक ट्रैक्टर-ट्राली लिए खड़ा रहा और जब गेहूं डालने का मौका मिला तो ऊपर बूंदाबांदी हो गई। ऐसे हालात की कोई जिम्मेदारी नहीं ले रहा। मंडियों में किसानों की दुर्दशा हो रही है।
कोई नहीं ले रहा सुध : हुकम चंद
किसान हुकुम चंद का कहना है कि किसानों ने इतनी मेहनत कर गेहूं की फसल तैयार की है। मंडी तक भी पहुंचा दिया, इसके बावजूद सरकार व प्रशासन इसे समेट नहीं पा रही है। उठान की कोई सुध नहीं ले रहा है। उन्हें मंडियों में गेहूं डालने की जगह नहीं मिल रही है।
सरकार व अधिकारी हो नुकसान के जिम्मेदार : बलविंद्र
आढ़ती बलविंद्र सिंह का कहना है कि अनाजमंडियां पूरी तरह से अटी पड़ी है, लेकिन गेहूं उठान की व्यवस्था आज तक नहीं सिरे चढ़ पाई है। खरीद व तुलाई की गई गेहूं पर खराब मौसम की मार पड़ रही है जबकि किसानों को गेहूं डालने की जगह तक नहीं मिल रही। गनीमत है कि अभी मौसम की मार नहीं पड़ी, लेकिन ऐसा होने पर अधिकारी व सरकार ही जिम्मेदार होने चाहिए।
कुरुक्षेत्र। थानेसर अनाज मंडी में बारिश से भीगने से बचने के लिए गेहूं की बोरियों पर ढकी तिरपाल।
कुरुक्षेत्र। थानेसर अनाज मंडी में बारिश से भीगने से बचने के लिए गेहूं की बोरियों पर ढकी तिरपाल।