अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की बैठक प्रदेशाध्यक्ष धर्मपाल छौत की अध्यक्षता में किसान रेस्ट हाउस में हुई। बैठक में 23 दिसंबर को हुडा पार्क जींद में होने वाली जाट आरक्षण अधिकार रैली को लेकर चर्चा की गई।
इस दौरान प्रदेशाध्यक्ष धर्मपाल ने कहा कि आरक्षण जाटों का हक था। केंद्र और प्रदेश की सरकार ने कोर्ट की आड़ लेकर जाटों का हक छीनने का काम किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 17 मार्च को जाट आरक्षण रद्द किया, लेकिन सरकार ने इस तारीख से पहले जाट बिरादरी के युवाओं द्वारा नौकरियों के लिए किए गए आवेदनों को भी आरक्षित श्रेणी से बाहर कर दिया। इसके चलते यूपीएससी की परीक्षा पास कर चुके बिरादरी के लगभग 196 परीक्षार्थी प्रभावित हुए। इसके अलावा लगभग पांच हजार आवेदक अन्य नौकरियों से वंचित कर दिए गए।
अब जाट अपना हक लेकर रहेेंगे और जींद रैली में आंदोलन की घोषणा की जाएगी। बैठक में जिलाध्यक्ष बलदेव सिंह मुकीमपुरा, जगदीश राठी संधौला, नरेंद्र एडवोकेट, कमल काजल, महावीर सिंह चहल, बलविंद्र सिंह ईश्हाक, निर्मल जखवाला, जरनैल स्योंसर, सुरेंद्र मलिक, सहदेव सारसा, सतीश तंगौली, अमरीक ईश्हाक, रामफल बाखली, बलकार, बीरा राम, मास्टर बलदेव सिंह, जसमेर सिंह, मलखान सिंह, सेवा सिंह, गुरदीप जखवाला आदि मौजूद रहे।
‘सैनी के बयानों के पीछे केंद्र और प्रदेश सरकार’
उन्होंने कहा कि सांसद राजकुमार सैनी के जाट विरोधी बयानों के पीछे केंद्र व प्रदेश सरकार का हाथ है। पर्दे के पीछे सैनी के कड़वे बोलों पर उनकी पीठ थपथपाई जा रही है।
अब जाट समाज कोई भी गलत टिप्पणी सहन नहीं करेगा। गलत बोलने वालों को जवाब दिया जाएगा। जाटों ने कहा कि जट्ट सिख, त्यागी, बिश्नोई सहित कई बिरादरियों को भी जाटों के साथ आरक्षण मिला था। इसलिए यह लड़ाई इनकी की भी है। इन्हें आंदोलन में साथ देना चाहिए।