कुरुक्षेत्र। जिला कारागार सोमवार को गीता के श्लोकों से गुंजायमान हुआ। सैकड़ों कैदियों ने गीता के पांचवें अध्याय के श्लोकों का सामूहिक पाठ करते हुए यज्ञ में आहुतियां दीं। इस यज्ञ का आयोजन मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा किया गया।
मिशन के संयोजक डॉ.श्रीप्रकाश मिश्र ने बंदियों को गीता की शिक्षा अपने जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया। मातृभूमिसेवा मिशन द्वारा आयोजित अठारह दिवसीय कार्यक्रम के पंचम दिवस ‘मानवीय जीवन मूल्यों के संदर्भ में श्रीमद्भगवतगीता’ विषय पर गीता संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत बंदियों से गीता को जीवन में धारण करने का संकल्प करवाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला जेल अधीक्षक डॉ. संजय सिंह, मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र, श्रुति विज्ञान आचार्यकुलम के परमाध्यक्ष आचार्य वेदव्रत एवं जेल उपाधीक्षक शिवेंद्रपाल सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित करके किया।
कार्यक्रम जेल के हवालाती एवं बंदियों ने सामूहिक रूप से वैदिक हवन यज्ञ में श्रीमद्भगवतगीता के पांचवें अध्याय के श्लोकों की आहुति डाली और सामूहिक गीता पाठ किया। आचार्य वेदव्रत के सान्निध्य में वैदिक हवन यज्ञ संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला जेल अधीक्षक डॉ. संजयसिंह ने कहा किसी भी इंसान के जीवन में मूल्यों का अहम योगदान रहता है क्योंकि इन्हीं के आधार पर अच्छा-बुरा या सही-गलत की परख की जाती है। मानव जीवन की पहचान उसके जीवन मूल्य हैं। उसके बाद उसका विद्यालय,जहां से उसे शिक्षा हासिल होती है। परिवार, समाज और विद्यालय के अनुरूप ही एक व्यक्ति में सामाजिक गुणों और मानव मूल्यों का विकास होता है। प्राचीन भारत में पाठशालाओं में धार्मिक शिक्षा के साथ मूल्य आधारित शिक्षा भी जरूरी होती थी। लेकिन समय के बदलाव के साथ यह कम होता चला गया और आज वैश्वीकरण के इस युग में मूल्य आधारित शिक्षा की भागीदारी लगातार घटती जा रही है। कार्यक्रम में रघुवीर सिंह, डिप्टीलाल, मुकेश सहित समस्त जेल के प्रशासनिक अधिकारी एवं मातृभूमि सेवामिशन के सदस्य मौजूद रहे।