कुरुक्षेत्र। मातृभूमि सेवा मिशन में आयोजित विचार गोष्ठी में हिस्सा लेते पूर्व निदेशक डाॅ. रणद
कुरुक्षेत्र। मातृभूमि सेवा मिशन धर्मक्षेत्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित 18 दिवसीय कार्यक्रम के सातवें दिन श्रीमद्भागवत गीता का समाज पर प्रभाव विषय पर एक विचार गोष्ठी कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ कल्याण मंत्र से हुआ। विचार गोष्ठी में डॉ. मिश्र ने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गीता में निहित शिक्षाओं का पालन करने से व्यक्ति साहसी और निडर बन जाता है।
उन्होंने कहा कि गीता को आत्मसात करके व्यक्ति लोभ, जलन, अहंकार, छल, कपट, स्वार्थ, और कटुता से दूर हो सकता है। गीता से सीखकर व्यक्ति अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ सकता है और आत्मबल बढ़ा सकता है। वर्तमान काल की मानव जीवन की समस्त समस्याओं का समाधान कर सकता है। गीता में बताए गए सिद्धांतों का पालन करने से व्यक्ति वर्ग-संघर्ष की समस्या का समाधान कर सकता है और समाज में एक नई सोच, विचार एवं मूल्य परक समाज की स्थापना कर सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आयुष विभाग गुजरात के पूर्व निदेशक डाॅ. रणदीप सिंह ने कहा कि श्रीमद्भागवत से शिक्षा लेकर मनुष्य लोभ, जलन, अहंकार, छल, कपट, स्वार्थ एवं कटुता से दूर होकर एक नवीन समाज की स्थापना कर सकेगा। इसके बाद उसका हर कर्म समस्त मानव जाति के लिए समृद्धि लाएगा।