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Kurukshetra News: डिपो में घट रहीं बसें, यात्री झेल रहे परेशानी

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। रोडवेज डिपो में बसों की संख्या निरंतर कम होती जा रही है। बसों की संख्या कम होने से यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। दर्जनों रूट ऐसे हैं जिन पर बसों के चक्कर कम हो चुके हैं। अकेले पिहोवा रूट पर ही करीब 30 टाइम कम हुए हैं।
पिहोवा रूट पर बसों के करीब 65 टाइम थे। लुधियाना, चंडीगढ़-दिल्ली, देहरादून, ऋषिकेश रूट पर करीब तीन माह से बस सेवा बंद है। इतना ही नहीं लोकल रूटों पर भी बसों के चक्कर कम हो रहे हैं।
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पिपली से थर्ड गेट तक विभाग द्वारा पांच से सात बसें चलाई जा रही थी। अब तीन से चार बसें ही चल रही है। लंबे रूटों पर बसों के बंद होने का कारण बसों की कंडम स्थिति ही मानी जा रही है। डिपो में अधिकतर बसें पुरानी है। विभाग के ही कर्मियों की मानें तो लोकल रूट पर रोजाना आठ से 10 बसों के पहिये थम रहे हैं। बता दें कि दो साल में डिपो में करीब 70 बसें कंडम हुई है। वहीं हाल ही में एनसीआर के अधीन अलग-अलग डिपो में 53 नई बसों को भेजा गया, जिसकी एवज में डिपो को बसें तो मिलीं लेकिन इन बसों में से अधिकतर बसें कंडम होने के कगार पर हैं। डिपो में 250 बसों की जरूरत है लेकिन डिपो में महज 140 ही बसें हैं। इनमें सात बसें किलोमीटर स्कीम की भी है। विभाग परिवहन आयुक्त को करीब 100 बसों की मांग भेज चुका है।
नहीं मिली इलेक्ट्रिक बसें ः हाल ही में प्रदेश में किलोमीटर स्कीम के तहत विभिन्न डिपो को इलेक्ट्रिक बसें मिली हैं। कुरुक्षेत्र डिपो से भी 10 बसों की डिमांड भेजी गई थी लेकिन डिपो को बसें नहीं मिलीं। उम्मीद की जा रही थी कि इन बसों के मिलने से लोकल रूट पर बेहतर परिवहन व्यवस्था बन जाती।  
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रोडवेज महाप्रबंधक शेर सिंह का कहना है कि उन्होंने हाल ही में मुख्यालय के आदेश पर 53 बीएस छह बसों को एनसीआर के डिपो को दिया। जिस वजह से रूटों पर सेवाएं प्रभावित हुईं। मुख्यालय को बसों की मांग भेजी हुई है। जल्द ही बसें मिलने की उम्मीद है। यात्रियों को ज्यादा दिनों तक परेशान नहीं होना पड़ेगा जल्द ही रूटों पर बस सेवा बहाल होगी।
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