केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा जारी आम बजट से कुरुक्षेत्र की झोली फिर खाली रही। जिला वासियों को बजट से रेलवे व हवाई अड्डा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन कुरुक्षेत्र की आस फिर से अगले बजट पर टिक गई है। वहीं बजट को लेकर अमर उजाला द्वारा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में बजट संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी टीचिंग एसोसिएशन (कुटा) प्रधान परमेश कुमार, संयुक्त सचिव हरविंद्र सिंह, सांख्यकी विभाग से डॉ. जितेंद्र खटकड़, दूरवर्ती शिक्षा निदेशालय से कुलदीप सिंह, संगीत एवं नृत्य विभाग से डॉ. अशोक शर्मा, प्राणीशास्त्र विभाग से डॉ. दीपक राय व ललित एवं कला विभाग से डॉ. गुरचरण सिंह ने अपने विचार रखे। संवाद कार्यक्रम में शिक्षा, स्वास्थ्य, रेलवे व कृषि बजट पर अपने विचार रखे। बजट कुटा प्रधान परेमश कुमार ने कहा कि 1956 में केयू की स्थापना हुई थी। स्थापना के बाद पहला विभाग संस्कृत था इसलिए केयू को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलना चाहिए था। उम्मीद है कि अगले बजट में मांग पूरी हो जाए।
कुटा प्रधान डॉ. परमेश कुमार का कहना है कि बजट को शिक्षा की दृष्टि से देखें तो सबसे अहम फैसला यह लिया गया है कि लद्दाख में केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने की योजना है, लेकिन हरियाणा की पहली कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को भी केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में दर्जा दिया जाना चाहिए। इसके अलावा कर्मचारियों का रुका हुुआ डीए का एलान जल्द से जल्द कर देना चाहिए। शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा बढ़ाकर 65 वर्ष होनी चाहिए ताकि अनुभवी शिक्षकों को अपनी सेवाएं देने का ज्यादा मौका मिले।
सांख्यिकी विभाग से डॉ. जितेंद्र खटकड़ ने कहा कि इस बार बजट में पहले से कम विभाग का ही निजीकरण हुआ है। कृषि बजट को बढ़ाकर पेश किया गया है। कई चीजों पर पहले से ही जीएसटी लगी हुई है जिससे सरकार की आमदनी हुई है तो सरकार को कुछ छूट देने के बारे में सोचना चाहिए था। इसके अलावा मेट्रो के विस्तार का निर्णय अच्छा कदम है।
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी टीचर एसोसिएसन के संयुक्त सचिव एवं संगीत विभाग से हरविंद्र सिंह का मानना है कि सरकार द्वारा मेट्रो के विस्तार के निर्णय से वातावरण पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। स्वास्थ्य संबंधी भी कई समस्याएं उत्पन्न होगी।
दूरवर्ती शिक्षा निदेशालय से कुलदीप सिंह का कहना है कि रेलवे के विस्तार अच्छी बात है लेकिन पेड़ पौधों को को इससे कितना नुकसान होगा। इस बारे में भी जरूर ध्यान देना चाहिए। इसके लिए कोई ठोस रणनीति बनानी चाहिए।
संगीत एवं नृत्य विभाग से डॉ. अशोक शर्मा का कहना है कि गीता को विश्व के कोने-कोने में पहुंचाने के लिए केयू का अहम योगदान रहा है। इसलिए केयू का संस्कृत विश्चविद्यालय का दर्जा दिया जाना चाहिए था।
प्राणी शास्त्र विभाग से डा. दीपक राय का कहना है कि यह बजट अर्थव्यवस्था को उठाने का काम करेगा। आदिवासी ऐरिया सहित पिछड़े इलाकों में जहां शिक्षा की कमी है वहां एकलव्य स्कूल खोलने का फैसला बेहतरीन कदम साबित होगा।
ललित एवं कला विभाग से डा. गुरचरण सिंह ने कहा कि बजट में स्टेट यूनिवर्सिटी के लिए ज्यादा फंड का एलान होना चाहिए था ताकि विश्वविद्यालय में शोध कार्य को प्राथमिकता दी जा सके। उच्चतर शिक्षा को ज्यादा से ज्यादा बजट मिलना चाहिए। हालांकि लेह में विश्वविद्यालय का ऐलान करना अच्छा फैसला है।
एडवोकेट लोकेश मेहता ने बताया बजट में 75 साल की आयु के पेशन धारकों को इनकम से बाहर रखना सहारनीय फैसला है। इसके अलावा हेल्थ सेक्टर के लिए भी बजट में कई सौगता दी है। खासकर कोरोना वैक्सीन के लिए 35 हजार रुपये दिए गए है। वहीं सोना-चांदी में सेंस में छूट दी गई है। सोना चांदी पर मिली छूट से सबको लाभ होगा।
नीडोनॉमिस्ट प्रो. एमएम गोयल ने कहा कि वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा यूनियन बजट 2021-22 का आकार 3483236 करोड़ रुपये के 2020-21 के 3042230 रुपये से बढ़ा। कुरुक्षेत्र में रहने वाले 75 वर्ष से ऊपर के वरिष्ठ नागरिक केंद्रीय बजट 2021-22 से बहुत खुश हैं क्योंकि उन्हें आयकर रिटर्न भरने से छूट दी गई है, जिसके लिए उन्हें आयकर अधिवक्ताओं की सेवा लेनी थी, जिनकी आय में गिरावट आएगी। मध्यम वर्ग को बिना किसी प्रत्यक्ष घोषणा के आत्मनिर्भरता को अपनाते हुए आत्मनिर्भर भारत अभियान की ओर योगदान करने के लिए प्रेरित किया है।