कुरुक्षेत्र। एनआईटी कुरुक्षेत्र में आयोजित राष्ट्रीय कांफ्रेंस में भाग लेते देश भर से आए विशेषज
कुरुक्षेत्र। देश में बनाए जाने वाले स्मार्ट शहरों के बुनियादी विकास को लेकर एनआईटी कुरुक्षेत्र में दूसरे दिन रविवार को भी देशभर से आए इंजीनियरों, वास्तुकारों, विशेषज्ञों व शोधकर्ताओं ने गहन मंथन किया। इसमें आम लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के साथ-साथ सरल व समृद्धि बनाने पर भी जोर दिया गया। सभी विशेषज्ञों ने माना कि स्मार्ट टेक्नोलॉजी व स्मार्ट मैटेरियल के जरिए स्मार्ट शहरों का बुनियादी विकास किया जाना चाहिए, जिससे सरकार का राजकोष भी बचेगा तो लोगों को बेहतर सुविधाएं भी मिल सकेंगी। इससे हमारे शहर भी विदेशी शहरों को टक्कर दे सकेंगे।
कॉन्फ्रेंस में रविवार को हरियाणा हाउसिंग बोर्ड के चीफ इंजीनियर डॉ. काबुल सिंह मुख्यातिथि रहे तो वहीं केयू यूआइटीडी के अध्यक्ष एवं प्रोक्टर डॉ. सुनील ढींगरा विशेष तौर पर आमंत्रित रहे। एनआईटी निदेशक डॉ. बीवी रमना रेड्डी ने भी नई तकनीक के साथ नई शिक्षा नीति के अनुरूप शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर बल दिया। वहीं कांफेंस के संयोजक एनआईटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग प्रो एचके शर्मा ने कहा कि सस्टेनेबल डिवलेपमेंट आज की आवश्यकता है। उसी अनुसार ही शहरों का विकास करना होगा। शहरी एरिया में 35 फीसदी आबादी रहती है जबकि भविष्य में यह और भी बढ़ने की संभावना है। ऐसे में भविष्य को देखते हुए स्मार्ट टेक्नालॉजी व स्मार्ट मैटेरियल के आधार पर आधारभूत सुविधाएं बढ़ाते हुए शहरों को विकसित करना होगा।
दूसरे दिन प्रस्तुत किए 50 शोधपत्र
कांफ्रेंस रविवार को अलग-अलग विभाग अनुसार छह सत्र में हुई, जिसमें 50 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें इंटरनेट ऑफ थिंग्स, रोबोटिक मशीन लर्निंग व ऑटोमेशन आदि पर विस्तार से चर्चा की गई। सभी में मानव जीवन को सरल बनाने के साथ-साथ शहरों के विकास पर मंथन किया।
प्रदेश व केंद्र सरकार को भेजी जाएगी रिपोर्ट : प्रो शर्मा
कॉन्फ्रेंस के संयोजक प्रो. एचके शर्मा का कहना है कि स्मार्ट शहरों को बनाए जाने को लेकर दो दिन गहनता से 20 से अधिक राज्यों के विशेषज्ञों, इंजीनियरों, वास्तुकारों व अन्य विशेषज्ञों ने मंथन किया है। इसमें एनआईटी की ओर से डॉ. अश्वनी जैन, डॉ. अरुण गोयल, डॉ. पंकज मुंजाल, डॉ. स्वेता राठी व डॉ. जितेंद्र यादव सहित अन्य शिक्षक भी शामिल रहे। दो दिन किए मंथन की अब विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जो प्रदेश व केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।