कुरुक्षेत्र। गांव गुमटी मंदिर में यज्ञ की परंपरा 72 वर्षों से चली आ रही है, लेकिन पहली बार श्री लक्षचंडी महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 17 राज्यों से पहुंचे ब्राह्मण मंत्रोच्चार कर रहे हैं। वहीं विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु भी पहुंचे हैं, जिसके यज्ञ नगरी में भारतीय संस्कृति की अद्भुत छटा दिख रही है।
श्री गुमटी वाली माता जी के मुताबिक, यजुर्वेद प्रथम अध्याय अनुसार यज्ञ ही सर्वोत्तम कर्म है। इसे ध्यान में रखते हुए ही श्री गुमटी मंदिर में 72 वर्षों से यज्ञों का आयोजन हो रहा है। वहीं पहली बार हो रहे श्री लक्षचंडी महायज्ञ में दक्षिणी भारत के केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश व कर्नाटक से 400 ब्राह्मण व उत्तर भारत के हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश व चण्डीगढ़ से तथा पश्चिमी भारत के गुजरात, राजस्थान व महाराष्ट्र के अलावा पूर्वी भारत के पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, बिहार तथा झारखंड से 1700 ब्राह्मण पहुंचे हैं। विदित हो कि श्री लक्षचंडी महायज्ञ के चलते गुमटी वाली माता जी मंदिर अचानक चर्चा में आ गया है, जबकि श्रीश्री 1008 माता प्रकाश देवी द्वारा वर्ष 1950 में इसकी स्थापना की गई थी।