कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के मुख्य कार्यक्रमों के अंतिम दिन सोमवार को पवित्र ब्रह्मसरोवर के घाट कला और संस्कृति का संगम स्थल बने रहे। जहां विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने अपनी-अपनी लोक संस्कृति को संजीव किया। वहीं उन्हें देख पर्यटक भी गदगद हो उठे।
विभिन्न प्रदेशों के वाद्य यंत्रों और लोक नृत्यों के साथ पर्यटक झूमते रहे।
जहां लद्दाख, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान सहित दूर-दराज से आए कलाकारों ने ब्रह्मसरोवर के घाटों पर धूम मचाई। वहीं हरियाणा पैवेलियन में हरियाणा की ऐतिहासिक धरोहर संजोए बेजोड़ नमूने, हरियाणा की आन-बान-शान देहाती पगड़ी, हरियाणा के पारंपरिक व्यंजन, देशी ठाठ-बाट, रहन-सहन, खेत-खलिहान को देख पर्यटक रोमांचित हो उठे। इसी दौरान मध्य प्रदेश के पैवेलियन में झलकती सांस्कृतिक धरोहर को देख पर्यटक आनंदित दिखाई दिए।
सोमवार को महोत्सव के 17वें दिन सरस और शिल्प मेले का आनंद लेने और खरीदारी करने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक ब्रह्मसरोवर के घाटों पर नजर आए। यह महोत्सव चरम पर पहुंच गया।
पर्यटकों ने विभिन्न प्रदेशों के व्यंजन जिनमें राजस्थान के चूरमे, कश्मीर का कहवा व चाय, गोहाना की जलेबी, छोले-भटूरे, पाव-भाजी आदि, पर्यटकों के स्वाद को बढ़ाते रहे।
केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल का कहना है कि भले ही सोमवार को महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम संपन्न हो गए लेकिन पवित्र ब्रह्मसरोवर पर शिल्प व सरस मेला 5 दिसंबर तक जारी रहेगा।
कुरुक्षेत्र। पवित्र ब्रह्मसरोवर पर प्रस्तुति से पहले उत्साहित छत्तीसगढ़ की कलाकार। आयोजक
कुरुक्षेत्र। पवित्र ब्रह्मसरोवर पर प्रस्तुति से पहले उत्साहित छत्तीसगढ़ की कलाकार। आयोजक