कुरुक्षेत्र। बहुचर्चित दिगंबर जैन मंदिर पुजारी हत्याकांड में जिला व सत्र जज दिनेश कुमार की अदालत ने फैसला सुनाते हुए दोनाें आरोपियों थानेसर निवासी दीपक कुमार उर्फ छोटू और रोहतक के सुनारिया निवासी अमन बुधवार को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
तीन अप्रैल 2024 को ब्रह्मसरोवर स्थित दिगंबर जैन मंदिर व धर्मशाला में पुजारी हुकुम चंद जैन की गला रेतकर हत्या की गई थी। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर धारा 302 (हत्या), 460 (रात में घर में घुसकर लूट), 201 (सबूत मिटाना), 34 और 120-बी (साजिश) के तहत चुनौती दी थी। पुलिस का दावा था कि पुरानी रंजिश के चलते दीपक ने अमन की मदद से पुजारी की हत्या की और नकदी व मोबाइल लूटा।
अभियोजन पक्ष अपराध सिद्ध करने में पूरी तरह असफल रहा। मुख्य आधार सीसीटीवी फुटेज था, जो पास की रोड़ धर्मशाला का था। फुटेज में रात के अंधेरे के कारण न तो चेहरे स्पष्ट थे, न स्कूटी का नंबर और न ही कपड़ों का रंग। चौकीदार दान सिंह ने दीपक को केवल मोटा शरीर होने के आधार पर पहचाना, जिसे अदालत ने अपर्याप्त बताया। जैन धर्मशाला के नॉन-वर्किंग सीसीटीवी की जांच तक नहीं की गई।
अदालत ने आरोपियों से बरामद चाकू, टी-शर्ट, जींस और नकदी की बरामदगी पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। कोई स्वतंत्र गवाह नहीं जोड़ा गया। चाकू खुले स्थान भाखड़ा नहर के पास से मिला, जिसकी विशेष कब्जे की पुष्टि नहीं हुई। एफएसएल रिपोर्ट में कपड़ों और चाकू पर मानव रक्त मिला, लेकिन डीएनए टेस्ट नहीं कराया गया, इसलिए यह साबित नहीं हुआ कि रक्त मृतक का था। फैसले में धारा 120-बी (साजिश) और 201 (सबूत मिटाना) के आरोप भी खारिज कर दिए गए, क्योंकि इनके लिए कोई ठोस सबूत नहीं था। संवाद