कुरुक्षेत्र। दयानंद महिला महाविद्यालय में संस्कृत साहित्य में पर्यावरण संरक्षण का आधुनिक दृष्टिकोण शीर्षक के तहत पुस्तक का विमोचन किया गया। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित पर्यावरणीय चेतना को समकालीन संदर्भों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में दर्शाया। पुस्तक संस्कृत साहित्य में निहित पर्यावरण संरक्षण संबंधी सिद्धांतों एवं उनके आधुनिक संदर्भों का गहन एवं शोधपरक विश्लेषण प्रस्तुत करती है। प्राचार्य डॉ. उपासना आहूजा ने इस बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि पुस्तक का लेखन एवं संपादन आरकेएसडी कॉलेज कैथल के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनय सिंघल, डीएन कॉलेज से एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुमन राजन और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रीजा ने किया। पुस्तक में वेद, उपनिषद, पुराण, महाकाव्यों तथा अन्य संस्कृत ग्रंथों में वर्णित प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता, जल, वन, वायु तथा पृथ्वी के प्रति उत्तरदायित्व जैसे विषयों को आधुनिक पर्यावरणीय चुनौतियों के संदर्भ में व्याख्यान किया है। यह कृति भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन पर्यावरणीय विमर्श के मध्य एक सशक्त सेतु का कार्य करती है। भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित पर्यावरणीय चिंतन वर्तमान में वैश्विक पर्यावरण संकट के समाधान के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। पुस्तक शैक्षिक जगत को समृद्ध करने के साथ युवा पीढ़ी में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता एवं उत्तरदायित्व की भावना को भी सुदृढ़ करेगी। इस अवसर पर उर्मिला पंघाल, अंजु चावला, सपना अरोड़ा और डॉ. अनु चौहान सहित अन्य मौजूद रहे।