कुरुक्षेत्र। पिछले वर्ष करीब साढ़े पांच माह पहले थानेसर विधानसभा क्षेत्र में खिसकी सियासी जमीन को भाजपा अब निकाय चुनाव में फिर से हथियाने में कामयाब रही है। प्रतिष्ठा का सवाल बने इन चुनाव में भाजपा को एक बार फिर बड़ी संजीवनी मिली है, जिससे नेताओं से लेकर हर कार्यकर्ता की बाछें खिल उठी है। कांग्रेस विस चुनाव में मिली जीत के बावजूद भी निकाय चुनाव में अपनी जमीन बचाने में सफल नहीं हो सकी। यहां नप अध्यक्ष पद के लिए भाजपा व कांग्रेस में सीधी टक्कर थी। भाजपा ने जहां नप अध्यक्ष के साथ-साथ पार्षद पदों के लिए भी अपने प्रत्याशी उतारे थे वहीं कांग्रेस सिर्फ नप अध्यक्ष तक ही सिमट गई थी लेकिन अध्यक्ष पद के लिए दोनों ओर से ही ये चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन चुके थे। दोनों राजनीतिक दलों के साथ-साथ पूर्व मंत्री सुभाष सुधा व अशोक अरोड़ा की प्रतिष्ठा से जोड़कर भी ये चुनाव देखे जा रहे थे और ऐसे में इस चुनाव पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुईं थीं।
भाजपा की ओर से पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा तो कांग्रेस की ओर से पूर्व मंत्री एवं थानेसर के वर्तमान विधायक अशोक अरोड़ा कमान संभाले हुए थे। अब भाजपा ने अध्यक्ष पद ही नहीं 30 में से 23 वार्डों में जीत दर्ज की है जबकि दो पार्षदों को भाजपा पहले ही सर्वसम्मति से बनाने में कामयाब रही थी। नप अध्यक्ष के लिए भाजपा की माफी ढांडा ने कांग्रेस की सुनीता नेहरा को 32577 वोटों से हराया है।
बता दें कि भाजपा के सुभाष सुधा वर्ष 2014 व 2019 में लगातार थानेसर विधायक बने थे तो गत वर्ष हुए चुनाव में उन्हें कांग्रेस के अशोक अरोड़ा ने 3243 वोटों से हरा दिया था। इस चुनाव में भाजपा को 46.67 फीसदी वोट मिले थे जबकि कांग्रेस जीत के साथ-साथ 48.93 वोट हासिल करने में कामयाब रही थी। ऐसे में माना जाने लगा था कि इस चुनाव का निकाय चुनाव पर भी सीधा असर पड़ेगा लेकिन निकाय चुनाव इसके विपरीत रहे और माना जा रहा है कि कांग्रेस समर्थित केवल चार प्रत्याशी ही जीत दर्ज कर पाए जबकि भाजपा कमल का फूल 25 वार्डों में खिलाने में कामयाब रही। इस चुनाव से इस पार्टी को फिर बड़ी ऑक्सीजन मिली है।
अब तक नप पर सुधा परिवार का रहा वर्चस्व
नगर परिषद पर अब तक सबसे ज्यादा वर्चस्व सुधा परिवार का ही रहा है। थानेसर नगर परिषद वर्ष 1995 में ही बनी थी और सुभाष सुधा पहले चेयरमैन बने थे। यह भी माना जाता है कि यहीं से उनकी राजनीति को बड़ी दिशा मिली। इसके बाद वर्ष 2000 में कांता सिंगला चेयरपर्सन बनी तो वर्ष 2005, 2011 व 2016 में सुभाष सुधा की पत्नी उमा सुधा चेयरपर्सन बनी। 25 मई 2021 को उनका कार्यकाल खत्म हो गया था और शहर की जनता इसके बाद अब तक चुनाव की बाट जो रही थी।
नप को मिली पहली एससी वर्ग की महिला अध्यक्ष
थानेसर नप अध्यक्ष पद को पहली बार एससी वर्ग की महिला के लिए आरक्षित किया गया है, जिसमें माफी ढांडा पहली अध्यक्ष बनी है। इसके लिए इस वर्ग की पांच महिला प्रत्याशी मैदान में थी, जिनमें कांग्रेस की सुनीता नेहरा भी शामिल रही।