कुरुक्षेत्र। पेंटिंग करती हुई भारती। स्वयं
- फोटो : संवाद
कुरुक्षेत्र। कल्याण नगर की युवा कलाकार भारती ने जीवन की सबसे बड़ी चुनौती को अपनी ताकत बनाया है। छठी कक्षा में हुए एक हादसे में उन्होंने अपने दोनों हाथ खो दिए थे। हाथ कोहनी तक नहीं होने के बावजूद वह ब्रश से शानदार चित्रकला तैयार करती हैं। वह दीवारों पर आकर्षक दीवार चित्रकला भी बनाती हैं। अपनी कला के दम पर भारती देशभर में पहचान बना रही हैं। वह कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। बचपन में हुए हादसे के बाद उनका लंबा इलाज और सर्जरी का दौर चला। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी पढ़ाई जारी रखी। कला को ही उन्होंने अपना जीवन बना लिया। भारती ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ फाइन आर्ट की पढ़ाई पूरी की है। फिलहाल वह एक स्वतंत्र चित्रकार के रूप में कार्य कर रही हैं। एक्रेलिक चित्रकला उनकी विशेष पहचान है। उनकी बनाई कलाकृतियों की प्रदर्शनियां दिल्ली, हैदराबाद, अमृतसर और चंडीगढ़ सहित कई शहरों में लग चुकी हैं। उत्कृष्ट कला के लिए उन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है।
100 बच्चों को दे चुकी पेंटिंग का प्रशिक्षण
भारती अब तक करीब 100 बच्चों को पेंटिंग का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। हैदराबाद और चंडीगढ़ में भी उन्होंने बच्चों को चित्रकला की बारीकियां सिखाई हैं, इसके अलावा मेहंदी और वाल पेंटिंग के गुर भी वह छात्रों को सिखा रही हैं। उन्होंने बताया कि वह स्कूली बच्चों को भी पेंटिंग की बारीकियां सिखा चुकीं।
इरादा मजबूत हो तो हराई जा सकती है हर मुश्किल
भारती लैपटॉप, मोबाइल को अच्छे से चलाती हैं। वे बताती हैं कि अक्सर लैपटॉप पर भी डिजाइन तैयार कर उसके बाद उसे ब्रश से पेपर और दीवार पर उतारती हैं। उनका कहना है कि शारीरिक कमी कभी भी प्रतिभा और सपनों के बीच दीवार नहीं बन सकती। मजबूत इरादे और लगातार मेहनत से हर मुश्किल को हराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हुनर हो तो कोई भी आपका रास्ता नहीं रोक सकता है।
कुरुक्षेत्र। पेंटिंग करती हुई भारती। स्वयं- फोटो : संवाद