कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के वर्तमान स्वरूप के पीछे देश के दो बार प्रधानमंत्री रह चुके स्व. गुलजारी लाल नंदा का अहम योगदान रहा है, जिन्हें इस बार अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में विशेष तौर पर सम्मान दिया जा रहा है। न केवल पवित्र ब्रह्मसरोवर के आरती स्थल बल्कि सभी मुख्य आयोजन स्थलों पर भी उनके चित्र लगाए जाएंगे। यही नहीं उनके शोध केंद्र परिसर में 28 व 29 नवंबर को स्वदेशी मेला भी लगाया जाएगा। पहला मौका है जब गुलजारी लाल नंदा को महोत्सव के दौरान यह सम्मान मिल रहा है।
गुलजारी लाल नंदा की अध्यक्षता में ही 1 अगस्त 1968 में बोर्ड का गठन हुआ और बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए कुरुक्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने 22 वर्षों तक कुरुक्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को विकसित किया, ब्रह्मसरोवर और सन्निहित सरोवर जैसे तीर्थ स्थलों का जीर्णोद्धार करवाया और श्रीकृष्ण संग्रहालय की स्थापना की। उनके प्रयासों से कुरुक्षेत्र प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में जाना जाने लगा। वे 1967 व 1971 में दो बार कैथल क्षेत्र से लोकसभा सदस्य रहे।
हालांकि प्रशासन की ओर उनका स्टैच्यू ब्रह्मसरोवर के अर्जुन चौक पर स्थापित किया हुआ है और उनके नाम पर शोध केंद्र भी बनाया हुआ है। यही नहीं विभिन्न आयोजन के दौरान उन्हें श्रद्धांजलि भी दी जाती रही है। पिछले वर्ष गीता महोत्सव में उनके शोध केंद्र परिसर में स्वदेशी मेला भी महोत्सव के दौरान लगाया गया था। केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल का कहना है कि इस बार आरती स्थल व महोत्सव में मुख्य आयोजन स्थल व अन्य जगहों पर भी स्व गुलजारी लाल नंदा के चित्र लगाए जा रहे हैंं, ताकि पर्यटक उनके योगदान को याद कर सके।
कुरुक्षेत्र। अर्जुन चौक के पास स्थापित स्व गुलजारी लाल नंदा का स्टैच्यू । संवाद