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Kurukshetra News: भाकियू ने भारत-अमेरिका डील की प्रतियां फूंकी, ट्रेड डील के विरोध में तेज होगा संघर्ष

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कुरुक्षेत्र। भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी ने रविवार को बिरला मंदिर चौक पर नारेबाजी करते हुए भारत-अमेरिका-भारत ट्रेड डील की प्रतियां जलाकर विरोध किया। इससे पहले यूनियन ने 23 मार्च को पिपली में होने वाली किसान-मजदूर जनक्रांति रैली को सफल बनाने के लिए व्यापक रूपरेखा तैयार करने के लिए जाट धर्मशाला में राज्य स्तरीय बैठक की। इसके साथ ही उन्होंने किसान एकता में विरोधाभास पर 2020 में हुए आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि किसान पिपली में बुरी तरह पिटे उसके बाद ही एक हुए थे।
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राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौता के तहत हुई ट्रेड डील के बारे में किसानों को होने वाले नुकसान गिनवाए। उन्होंने जिला अध्यक्षों को गांव-गांव जाकर किसानों व मजदूरों को रैली में पहुंचने का निमंत्रण देने के लिए आह्वान किया। चढ़ूनी ने कहा कि पीपली ने होने वाली रैली में इस ट्रेड डील के विरोध में देश भर से हजारों की संख्या में किसान इकट्ठा होंगे। इसके साथ ही रैली में बिजली बिल व एमएसपी की मांग को मुख्य रूप से रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी यूनियन 27 फरवरी को देश के सभी जिलों में मोदी और ट्रंप के पुतले फंूकेगी और पांच मार्च से प्रचार रथ शुरू किया जाएगा, जो सभी जिले और तहसीलों पर पहुंचेगा। 10 मार्च से ट्रैक्टर मार्च निकल जाएंगे और सभी जिले में गांव स्तर पर ट्रैक्टरों से जाकर 23 मार्च की रैली का न्योता दिया जाएगा। इस दौरान पदाधिकारी की ड्यूटियां भी लगाई गईं।
बैठक में प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य कर्म सिंह मथाना, मीडिया प्रभारी राकेश कुमार बैंस, यमुनानगर जिला प्रधान संजू गुडियाना, सिरसा जिला अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह नंबरदार, जिला अध्यक्ष कृष्ण कुमार (कलाल माजरा), रेवाड़ी जिला अध्यक्ष समय सिंह, अंबाला जिला अध्यक्ष मलकीत सिंह, युवा प्रदेश अध्यक्ष विक्रम कसाना सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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एकता पर सवाल, चढ़ूनी गुट अलग
सोमवार को 10 किसान संगठनों की ओर प्रस्तावित सीएम आवास के घेराव की कॉल से चढ़ूनी गुट ने अपने आप को दूर रखते हुए कहा कि जब तक किसान पिटता नहीं है तब तक वह एक नहीं होता है। उनके पास इस घेराव में शामिल होने का कोई निमंत्रण नहीं है। इसलिए वह इस विराेध से अपने-आप को दूर रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसान संगठन भी अपनी चौधर की लड़ाइयां लड़ते हैं, लेकिन सभी के तरीके अलग-अलग है, लेकिन मांग तो सभी की एक है। उन्होंने कहा कि 23 मार्च को पिपली में होने वाली रैली किसानों को दोबारा एक मंच पर लेकर आने का काम करेगी। क्योंकि 2020 में किसान पिपली में बुरी तरह पिटे उसके बाद ही एक हुए थे।


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चिप्स कंपनियां समझौता तोड़ भागी : चढ़ूनी
गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि भारत ट्रेड डील का असर हरियाणा के किसानों पर दिखने लग गया है। आज आलू का किसान 50 रुपये क्विंटल आलू बेचने को मजबूर है। क्योंकि चिप्स कंपनी भारत में अपना समझौता तोड़कर भाग चुकी है। वह बाहर से आलू खरीद रही है। उनकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा, लेकिन आलू का किसान अब आलू बेचने के लिए ठोकरे खाने को मजबूर है। सरकार भी उसके साथ पुराने माप-दंडों के आधार पर भावांतर योजना के तहत थोड़ा पैसा दे रही है।



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ट्रेड डील से कोई खतरा नहीं, बस सरकार पहले भारत के किसान की फसल एमएसपी पर खरीदे
चढ़ूनी ने कहा कि अगर सरकार उनकी सारी फसल एमएसपी पर खरीद ले तो उन्हें ट्रेड डील से कोई खतरा नहीं, लेकिन सरकार किसानों को एमएसपी देने से बचने के लिए इस ट्रेड डील को लेकर आई है। ताकि किसानों को एमएसपी न देनी पड़े। साथ ही किसानों की जमीन कंपनियों को सौंप दी जाएगी और किसान अपनी जमीन पर मजदूर बनकर रह जाएगा।
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