कुरुक्षेत्र। दिवाली के पांच दिवसीय महोत्सव का समापन भाईदूज के पावन पर्व के साथ होता है। यह पर्व भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति समर्पण का प्रतीक है। इस वर्ष भाईदूज का पर्व वीरवार को उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ मनाया जाएगा।
ज्योतिषाचार्य रामराज कौशिक ने बताया कि भाई को तिलक करने का शुभ मुहूर्त दोपहर एक बजकर 13 मिनट से तीन बजकर 28 मिनट तक रहेगा। मान्यता है कि इस समय बहन की ओर से भाई को तिलक कर आरती उतारने और शुभकामनाएं देने से दोनों के जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
भाईदूज पर्व को यम द्वितीया भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने उसके घर गए थे। यमुना ने प्रेमपूर्वक उनका स्वागत कर तिलक लगाया और उनकी दीर्घायु की कामना की। प्रसन्न होकर यमराज ने आशीर्वाद दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक कराएगा, उसे दीर्घायु और सुख-समृद्धि प्राप्त होगी। इसी परंपरा के रूप में आज भी यह पर्व मनाया जाता है।
भाईदूज पर्व के लिए बहनों की ओर से विशेष तैयारियां की गई हैं। बहनें थाल में तिलक, मिठाई, दीपक, अक्षत, नारियल सहित पूजन सामग्री मंगलवार को खरीदती नजर आई। भाई अपनी बहनों के घरों के लिए रवाना हुए और उपहार खरीदते दिखे। बाजारों में भी इस पर्व पर रौनक देखने को मिली।