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भागवत पुराण से मिलती है सभी पापों से मुक्ति : ठाकुर

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कुरुक्षेत्र। जयराम विद्यापीठ में भागवत पुराण की कथा करते कथावाचक कृष्ण चंद्र शास्त्री ठाकुर। वि
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कुरुक्षेत्र। श्री गीता के जन्मोत्सव गीता जयंती महोत्सव के अवसर पर श्री जयराम विद्यापीठ परिसर में परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी के सान्निध्य में आयोजित भागवत पुराण की कथा का दूसरा दिन रहा। व्यासपीठ से विख्यात कथावाचक कृष्ण चंद्र शास्त्री ठाकुर ने संगीतमयी शैली में कहा कि भागवत मानव जीवन की अपनी कथा है। धर्म के चार चरणों की कल्पना की जाए तो इसमें सत्य, दान, दया और पवित्रता ही आते हैं। कलयुग में इनमें से सिर्फ एक चरण बचता है वह है सिर्फ सत्य। सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं होता और असत्य से बढ़कर कोई पाप नहीं है।
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उन्होंने कहा कि भगवान विश्वास में ही समाया है। भागवत का सीधा अर्थ भगवान का मंदिर, भगवान का उपदेश, भगवान का प्रेमी और भगवान का भक्त है। यहां कथा शुरू होने से पहले परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी एवं श्रद्धालुओं ने भागवत पुराण का पूजन किया। कथावाचक ने बताया कि भागवत कथा सुनने से मानव के पाप क्षीण हो जाते हैं। कृष्ण चंद शास्त्री ने आत्मदेव ब्राह्मण की कथा का भक्तों को रसपान कराया।
उनके साथ में कथावाचक ने राजा परीक्षित की कथा का वर्णन किया। कथा को सुनने के लिए भारी संख्या में कथा प्रेमी एवं श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने आत्मदेव ब्राह्मण की कथा सुनाते हुए उनके दोनों पुत्रों धुंधकारी और गोकर्ण के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्म पर चलने और अधर्म पर चलने से क्या लाभ होता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। दूसरे दिन की कथा के समापन पर कथा के श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ पर भागवत पुराण की आरती की। संगीतमयी कथा में भजनों पर कई बार श्रद्धालु झूमने पर मजबूर हुए।

कुरुक्षेत्र। जयराम विद्यापीठ में भागवत पुराण की कथा करते कथावाचक कृष्ण चंद्र शास्त्री ठाकुर। वि

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