लाडवा । जानकारी देता युवक विशाल लालर।
लाडवा (कुरुक्षेत्र)। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने जिन युवाओं को डिपोर्ट किया है उनमें लाडवा कस्बे के बूढ़ा गांव के दो युवक विशाल लालर 31 वर्ष तथा विकास उर्फ मोनू लगभग 35 वर्ष भी शामिल हैं।
विशाल लालर ने बताया कि डिटेंशन सेंटर में उन्हें पेट भर खाना भी नहीं मिलता था। इतना ही नही उनके आगे बीफ (गोमांस) भी परोसा जाता था। पांच जनवरी को सभी 209 युवाओं को हथकड़ी लगा कर भारत डिपोर्ट कर दिया गया। दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने से आधा घंटा पहले उनकी हथकड़ी खोली गई। सात जनवरी बुधवार दोपहर को वे इंदिरा गांधी नेशनल एयरपोर्ट पर उतरे। वह अक्टूबर 2022 में इंग्लैंड, तुर्की होता हुआ डंकी रूट से मैक्सिको पहुंचा और 27 नवंबर को बॉर्डर पार कर अमेरिका चला गया।
उसने बताया कि अमेरिका काम करते हुए वहां का ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया और ट्रक पर ड्राइवरी करने लगा। उसने बताया कि सब कुछ अच्छे तरीके से चल रहा था और खर्चा निकाल कर वह घर भी पैसे भेजता था। लगभग छह महीने पहले जुलाई 2025 में अमेरिका की प्राइवेट आईस सिक्योरिटी टीम के लोगों ने उसे व अन्य लड़कों को पकड़ लिया और डिटेंशन सेंटर (कैंप) में भेज दिया।
पूरा दिन कमरे में बंद करके रखा जाता : विशाल ने बताया कि पूरा दिन कमरे में बंद करके रखा जाता था। खाने में सब्जी और रोटी नहीं मिलती थी। पूरे दिन के लिए राजमा उबाल कर रख दिया जाता था और वही खाने के लिए दिया जाता था खाना मना करने पर मारपीट करते थे।
विशाल बोला- देश में रहकर काम करें युवा : विशाल ने बताया कि 2024 में ट्रंप शासन से पहले काम करने में कोई परेशानी नहीं थी लेकिन जब से ट्रंप ने अमेरिका की कमान संभाली है तब से वहां दूसरे देशों के युवाओं के लिए काम करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि भारत में रहकर छोटे से छोटा काम करें लेकिन डंकी रूट से अमेरिका का रुख न करें।