पहाड़ों की रानी शिमला में 21 साल पहले बने केयू रेस्ट हाउस में बेडशीट सहित अन्य मैटीरियल में घोटाले का पता चला है। इधर, इस प्रकरण की पुख्ता जांच से पहले इसे दबाने के प्रयास हो रहे हैं। हिमाचल की वादियों में बने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के इस आलीशान गेस्ट हाउस में सप्लाई की जा रही सामग्री की जांच अगर गहनता से हुई तो और भी राज खुल सकते हैं। हिमाचल के माल रोड के निकट स्थित इस गेस्ट हाउस के निर्माण को करीब दो दशक से ज्यादा समय बीत चुका है। अमर उजाला को कुछ ऐसे दस्तावेजों की प्रतियां मिलीं हैं, जिसमें उपरोक्त मामले की तस्वीर साफ है।
बता दें कि केयू प्रशासन समय-समय पर इस गेस्ट हाउस के रखरखाव के साथ तमाम प्रबंधों को आवश्यकतानुसार सुनिश्चित करता हैं। पिछले कुछ वर्षों में यहां सुविधाओं के लिये उपलब्ध पुरानी सामग्री को बदलने के लिये केयू प्रशासन ने प्रपोजल तैयार किया था। इसी के साथ ही रेस्ट हाउस के पुराने डबल बेड, गद्दों, बेडशीट को भी बदला गया गया था। ज्यादातर सामान की खरीद-फरोख्त कुरुक्षेत्र से ही की गई थी। इनमें बेड और बेडशीट भी शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार एक साल पहले शिमला (हिमाचल) स्थित इस गेस्ट हाउस के लिये जो सामग्री वहां पहुंचाई जानी थी, उस पूरे सामान की खरीद तो हुई, मगर पूरा सामान खरीदने के बावजूद आधा सामान ही गेस्ट हाउस तक हिमाचल पहुंच सका। हद की बात ये है कि मैटीरियल को खरीदे एक साल बीत चुका है, मगर इसमें से आधा सामान किसी उद्देश्य से कुरुक्षेत्र में दबाये रखा, इस बड़े सवाल का जवाब केयू प्रशासन को अगले दिनों में देना भारी पड़ेगा। बहरहाल केयू प्रशासन में उच्चपदों पर आसीन अधिकारी सीधे तौर पर इसका जवाब देने से कन्नी काट रहे हैं। हालांकि केयू के डायरेक्टर पब्लिक रिलेशन डॉ. बृजेश साहनी ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। जो भी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी हैं, उनसे जवाब तलब किया जाएगा। उन्होंने इस प्रकरण की पुख्ता जांच का आश्वासन दिया है।
होनी चाहिये थी शिमला में साल बाद निकली केयू में
केयू के एक अधिकारी ने बताया कि अगर सीट चेंज ना होती तो शायद उन दर्जनों बेडशीट पर पर्दा ही पड़ा रहता, जोकि शिमला में होनी चाहिये थे। बताया गया है कि लंबे समय से शिमला स्थित केयू गेस्ट हाउस की व्यवस्था का जिम्मा जिस अधिकारी के पास था, उसकी कुर्सी कुछ ही दिन पहले बदली गई है। इस कुर्सी पर अब एक जूनियर को बैठाया गया है। इसके बाद यह दर्जनों बेडशीट पुराने ऑफिस की अलमारी से निकाली गईं, जिसके बाद इन बेडशीट के बारे में पता चला। सवाल ये उठ रहे हैं कि जब उस कुर्सी का जिम्मा दूसरे स्टाफ मेंबर के पास आया तो यह दर्जनों बेडशीट क्यों निकाली गईं ?
दो बेड भी नहीं पहुंचे शिमला, छह माह से कुरुक्षेत्र में
पता चला है कि दर्जनों बेडशीट के अलावा छह बेड भी खरीदे गये थे। जिस तरह से दर्जनों बेडशीट को शिमला की बजाये कुरुक्षेत्र में ही दबाये रखा, इसी तरह शिमला गेस्ट हाउस के लिये जो बेड खरीदे गये थे, इनमें से दो उसी फर्नीचर यूनिट में करीब छह माह से रखे रहे, जहां से यह बेड खरीदे गये थे। जब यह बेड हिमाचल के कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय निवास के लिये खरीदे गये थे तो इतने महीनों तक इन्हें किस मकसद से कुरुक्षेत्र के मोहन नगर स्थित प्राईवेट फर्नीचर यूनिट पर रखा गया।
बंसीलाल ने किया था उद्घाटन, ये है सुविधा
चार बार हरियाणा प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे बंसीलाल ने इस पद पर रहते हुए धर्मनगरी कुरुक्षेत्र और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी को अनेक सौगातें दीं। वहीं, तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल के प्रयासों से ही हिमाचल की वादियों में शिमला में केयू का आलीशान गेस्ट हाउस बना था। इस गेस्ट हाउस का उद्घाटन 5 जून 1999 को बंसीलाल ने ही किया था। इस समय शिमला स्थित केयू के तीन मंजिला उक्त रेस्ट हाउस में गवर्नर, कुलपति, वीवीआई रूम, चार और छह बेड की डोरमैटरी सहित करीब कुल 22 कमरे हैं, किचन डायनिंग हाल इत्यादि हैं। पिछले वर्ष गेस्ट हाउस के रेनोवेशन के साथ किचनवेयर का सामान, 8 स्मार्ट टीवी, बेड, चादरें और अन्य काफी सामान हिमाचल भेजा गया था।