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बैंक हड़ताल के पहले दिन 300 करोड़ का लेनदेन प्रभावित

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निजीकरण के विरोध में सोमवार को जिलेभर के बैंकों पर ताले लटके रहे। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर कर्मियों ने सेक्टर-13 में एकत्रित होकर रोष मार्च निकाला। हड़ताल के पहले दिन जिले में 300 करोड़ से ज्यादा का लेनदेन प्रभावित हुआ। वहीं क्लोजिंग मंथ होने के कारण कई कंपनियों व सरकारी विभागों का कामकाज बुरी तरह से प्रभावित हो गया। रविवार को मिलाकर लगातार तीन दिन बैंक बंद रहने से उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है। दो दिन की हड़ताल से जिले में 600 करोड़ से ज्यादा का लेनदेन प्रभावित होगा।
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विरोध के लिए भारी संख्या में बैंककर्मी सुबह सेक्टर में एकत्रित हुए, जहां से शहर में रोष मार्च निकाल वापिस धरना स्थल पर पहुंचे। पंजाब नेशनल बैंक के राय सिंह और स्टेट बैंक के विनय तथा पंकज ने बताया कि जो सरकार बजट में 2 बैंकों के निजीकरण का प्रस्ताव लेकर आई है हम उसका पुरजोर विरोध करते हैं और आने वाले दिनों में और हड़ताल और अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी जाएंगे। उन्होंने बताया कि आज भी निजीकरण के विरोध में सुबह 10 बजे प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान उपायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकारी बैंकों पर आज भी भारत की जनता का भरोसा है और उनकी जमा पूंजी इसमें सुरक्षित है, लेकिन सरकार आरबीआई का पैसा हथियाने के बाद बैंकों की पूंजी पर नजर गड़ाए हुए हैं। इस पूंजी को सरकार के जो पूंजीपति मित्र हैं उनके हाथों बैंकों को बेचकर लुटाना चाहती है। साथ ही आम जनता को सरकारी बैंकों द्वारा मुद्रा के तहत और बहुत सारी छोटी छोटी स्कीमों के तहत जो लोन बांटा जाता है प्राइवेट बैंक बनने पर वह सुविधा भी मिलनी बंद हो जाएगी।
बैंक कर्मचारी नेता प्रीतम गोयत और जसपाल सिंह ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अब सरकार निजी व्यावसायिक घरानों के हाथों में सौंपना चाहती है। छोटे किसानों, दुकानदारों व मझौले उद्योगों को बचाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की आवश्यकता है। सरकार बैंकों के राष्ट्रीयकृत स्वरूप को खत्म करने पर तुली हुई है। बैंकों को निजी क्षेत्र को बेचने के तैयारी चल रही है।
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पूर्व बैंक अधिकारी हाकम चौधरी और पुष्पेंद्र शर्मा ने अधिकारियों से आगामी संघर्ष के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि बैंकों के विलय एवं निजीकरण से न केवल आम जनता को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ेगा बल्कि इससे रोजगार के अवसर भी कम हो जाएंगे। इससे वर्तमान कर्मचारियों की छंटनी का खतरा भी बढ़ेगा। इस अवसर पर विनोद अरोड़ा, विशाल सिंगला, संदीप कुमार, तेजा, बलराज, गुरदीप सिंह, अनीता वालिया, शिखा राणा, माधवी, कविता, शेरिल वालिया, सोनिया, पूजा गंभीर, मधु शर्मा, रमनजीत व प्रतिभा इत्यादि मौजूद रहे।
उपभोक्ता बलविंदर सिंह ने कहा कि गांव हसनपुर से कुरुक्षेत्र खाते में आ रही किसी समस्या का समाधान कराने आया था। यहां देखा तो बैंक पर ताला लटका मिला। उसे हड़ताल के बारे कोई सूचना नहीं थी। वह बहुत जरूरी काम छोड़कर आया था और अब वापस लौट रहा है।
राकेश ने कहा कि एसबीआई बैंक में माता पिता का ज्वाइंट खाता है, जिसमें पिता सैलरी आती है। पिता की मृत्यु के बाद खाते से पिता का नाम कटवाने के लिए एक सप्ताह से फार्म जमा कराया हुआ है। पहले छुट्टियां चलती रही अब हड़ताल हो गई । बैंक कर्मचारियों ने सोमवार का समय दिया था अब बैंक बंद पड़ा है।
रामचरण ने कहा कि घर में पैसों की जरूरत होने के चलते बैंक आए थे। यहां आकर पता चला की दो दिन बैंक कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इस वजह से वे बैंक से पैसे नहीं निकाल सके। उन्होंने बताया कि एटीएम नहीं होने के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है।
कुलदीप ने कहा कि सरकार हर सेक्टर का निजीकरण करने लग रही है। बैंकों का निजीकरण कर देना, मतलब लोगों की परेशानी को बढ़ाना। बैंकों में अधिकारियों से सरकार मनमाना काम कराएगी। उन्होंने कहा कि हड़ताल का पतचा नहीं होने से लोग दूर-दूर से आ रहे है और उनको परेशान होना पड़ रहा है।
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