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Kurukshetra News: पुलिस पर गोलीबारी के आरोपी राहुल वर्मा की जमानत याचिका खारिज

सार

कुरुक्षेत्र के शाहाबाद पुलिस गोलीबारी मामले में आरोपी राहुल वर्मा की जमानत याचिका अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार ने खारिज कर दी। न्यायालय ने गंभीर आरोपों और आपराधिक इतिहास के आधार पर यह निर्णय लिया।
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विस्तार
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कुरुक्षेत्र। शाहाबाद में पुलिस पर गोलीबारी के मामले में आरोपी राहुल वर्मा की नियमित जमानत याचिका को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार ने खारिज कर दिया। यह मामला 12 अप्रैल को दर्ज एफआईआर से संबंधित है जिसमें राहुल वर्मा और इमरान खान उर्फ मलिक उर्फ तालिबान पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 109(1), 3(5), 238 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25/27-54-59 के तहत गंभीर अपराध करने का आरोप है।
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पुलिस के अनुसार उप-निरीक्षक प्रेम चंद (सीआईए दो) को 12 अप्रैल को गुप्त सूचना मिली थी कि यमुनानगर के रादौर निवासी दो युवक राहुल वर्मा (24) और इमरान खान, मोटरसाइकिल (एचआर 02 क्यू-8181हीरो होंडा ग्लैमर) पर शाहाबाद क्षेत्र में घातक हथियारों के साथ गंभीर अपराध की योजना बना रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने रावा रोड के पास एक पुलिया पर तलाशी शुरू की, जहां दोनों युवक मोटरसाइकिल के पास खड़े मिले। पुलिस को देखते ही दोनों ने हथियार निकाले और गोलीबारी शुरू कर दी। पुलिस ने हवाई फायरिंग कर चेतावनी दी लेकिन युवकों ने आत्मसमर्पण के बजाय फिर से गोली चलाई। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया और हथियार व मोटरसाइकिल बरामद की।
राहुल के वकील ने तर्क दिया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और एफआईआर का संस्करण असंभव है। उन्होंने कहा कि राहुल 15 अप्रैल से हिरासत में है। जांच पूरी हो चुकी है और चालान दाखिल हो गया है। मुकदमा लंबा चलेगा और हिरासत का कोई उद्देश्य नहीं है। राहुल ने शर्तों का पालन करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने का वचन दिया।
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लोक अभियोजक हरिंदर नवेत ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि राहुल अपराध में सक्रिय रूप से शामिल है और उसके खिलाफ तीन अन्य गंभीर एफआईआर दर्ज हैं, जो उसके आपराधिक रिकॉर्ड को दर्शाती हैं। जमानत देने पर वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ या गवाहों को धमका सकता है। न्यायाधीश सतीश कुमार ने रिकॉर्ड और दलीलों का अध्ययन कर कहा कि केवल हिरासत की अवधि जमानत का आधार नहीं है। राहुल के खिलाफ गंभीर आरोप और आपराधिक इतिहास को देखते हुए जमानत देने से साक्ष्यों और मुकदमे पर असर पड़ सकता है। इसलिए वह याचिका खारिज कर रहे हैं।
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