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आयुर्टेक : आयुर्वेद में ज्ञान भी विज्ञान भी और अनुसंधान भी

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कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में गुरुवार को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर आयुर्टेक : इनोवेशन इन आयुर्वेदिक टेक्नोलॉजी विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। शुरुआत में उप कुलसचिव विकास शर्मा ने देश पर आए किसी भी आंतरिक या बाहरी संकटकाल में स्वयं को तन, मन और धन से राष्ट्र को समर्पित करने की शपथ दिलाई।
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कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र के निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी ने शिरकत की। बतौर वक्ता हरियाणा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) से डॉ. राहुल तनेजा और केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) नई दिल्ली से डॉ. हेमंत पाणिग्रही, डॉ. राकेश नारायण एवं डॉ. बबीता यादव ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए। आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. देवेंद्र खुराना ने कहा कि आयुर्वेद में ज्ञान भी है, विज्ञान भी है और अनुसंधान भी है।

कार्यक्रम के अंत में आयोजन सचिव प्रो. राजा सिंगला ने कहा कि आधुनिक तकनीक का समावेश आयुर्वेद को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध हो सकता है। आज का युग डिजिटल और डेटा-ड्रिवन है, ऐसे में आयुर्वेदिक पद्धतियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने और तकनीकी माध्यमों से डॉक्यूमेंटेशन की आवश्यकता है।
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पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान मिलकर एक नई दिशा का निर्माण करेंगे : प्रो. रेड्डी
मुख्यातिथि एनआईटी के निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी ने आयुर्वेद के क्षेत्र में इनोवेशन, अनुसंधान और सतत प्रगति की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जैसे आधुनिक तकनीकें, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक इंजीनियरिंग, मशीन लर्निंग और डीप रिसर्च विभिन्न क्षेत्रों में क्रांति लाई हैं, वैसे ही इन तकनीकों को आयुर्वेद में समाहित कर आयुर्वेदिक चिकित्सा को और अधिक प्रभावशाली व आधुनिक बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सिंदूर ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने तकनीकी दक्षता के जरिये दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले किए। यदि यही तकनीकी दक्षता चिकित्सा क्षेत्र में अपनाई जाए तो उपचार प्रक्रिया में सटीकता, गति और व्यापकता बढ़ेगी।
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दृढ़ संकल्प और नवाचार से आयुर्वेद को नई दिशा : प्रो. धीमान
आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि किसी भी विचार को साकार रूप देने के लिए सतत प्रयास, समर्पण और दृढ़ निश्चय की आवश्यकता होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि धूपम उपकरण ऑटोमेशन बस्ती यंत्र ऑटोमेशन क्षारसुत्र मशीन, जो आयुर्वेद की एक अनोखी अन्वेषण है। ये एक नई सोच और अटल संकल्प का ही परिणाम है।

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आयुर्वेद में तकनीकी नवाचारों की जानकारी से समृद्ध सत्र
हरियाणा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से डॉ. राहुल तनेजा ने प्रतिभागियों को ट्रेडमार्क, कॉपीराइट और पेटेंट जैसे बौद्धिक संपदा अधिकारों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि नवाचार को सुरक्षित रखने और वैज्ञानिक शोध को कानूनी मान्यता दिलाने में इन अधिकारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
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