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Kurukshetra News: कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न के बारे में किया जागरूक

Thu, 21 Aug 2025 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
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कुरुक्षेत्र। शिक्षक संस्थानों में कर्मचारियों को यौन उत्पीड़न से बचने के लिए जागरूक होना बहुत ही जरूरी है। यौन उत्पीड़न का अर्थ किसी को फिजिकल छूना नहीं होता कार्यस्थल पर कार्य करते समय असहज महसूस करना भी यौन उत्पीड़न हो सकता है। कर्मचारी अपने कार्यस्थल पर किसी का दबाव सहन न करें। दबाव देना, फब्तियां कसना, अश्लील इशारे करना यौन अपराध की श्रेणी में आता है।
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यह विचार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र की निदेशक प्रो. मंजुला चौधरी ने बतौर मुख्यातिथि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (केयूके) के प्रशिक्षण, योजना और निगरानी प्रकोष्ठ (टीपीएमसी) तथा आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के सहयोग में कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम 2013 विषय पर कुवि में कार्यरत लिपिकों के लिए आरकेसदन में आयोजित कार्यशाला में व्यक्त किए।

प्रो. मंजुला चौधरी ने पॉश अधिनियम के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भी यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) का उल्लेख किया गया है। आईसीसी की अध्यक्ष प्रो. सुनीता सिरोहा ने प्रतिभागियों को इंटरनल कंप्लेंट कमेटी की कार्य प्रणाली के बारे में बताया जो विश्वविद्यालय को लैंगिक शोषण मुक्त परिसर बनाने में सदा कार्यरत रही है। इस मौके पर नोडल आफिसर व परीक्षा नियंत्रक डॉ. अंकेश्वर प्रकाश, मीनाक्षी, सुनील कुमार, राहुल सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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