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देश के महान वैज्ञानिकों को मिला गोयल अवार्ड

Wed, 12 Apr 2017 12:30 AM IST
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
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award ceremony - फोटो : अमर उजाला
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गोयल अवार्ड कमेटी की ओर से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में मंगलवार को आयोजित समारोह में चार वैज्ञानिकों को गोयल पुरस्कार और 4 वैज्ञानिकों को राजीव गोयल यंग साइंटिस्ट अवार्ड के रूप में सम्मानित किया गया। गोयल पुरस्कार के रूप में वैज्ञानिकों को दो-दो लाख रुपये व राजीव गोयल अवार्ड के रूप में एक लाख रुपये की धनराशि के साथ मेडल व प्रशस्ति पत्र दिया गया।  
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समारोह में अप्लाइड साइंस के क्षेत्र में योगदान के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टेकभनोलॉजी कानपुर के डॉ. मनिंद्रा अग्रवाल, केमिकल साइंस के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट आफ केमिकल टेक्रोलोजी हैदराबाद के निदेशक डॉ. एस चंद्रशेखर, लाइफ साइंस के क्षेत्र में कार्य के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट आफ प्लांट मोलीक्यूलर बायोलॉजी के डॉ. जितेंद्र पाल खुराना व फिजिकल साइंस के क्षेत्र में योगदान के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस बैंगलोर के वैज्ञानिक डॉ. राहुल पंडित को गोयल अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त समारोह में 45 वर्ष से कम उम्र के चार वैज्ञानिकों को राजीव गोयल अवार्ड से सम्मानित किया गया। अप्लाइड साइंस में योगदान के लिए सेंट्रल ड्रग इंस्टीट्यूट लखनऊ के डॉ. अतुल गोयल, केमिकल साइंस के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस बैंगलोर के प्रो. गोविन्दास्मे मुगेश, लाइफ साइंस के लिए जेएनयू के डॉ. मुकेश जैन व फिजिकल साइंस के क्षेत्र में योगदान के लिए आईआईटी कानपुर के डॉ. अविनाश कुमार अग्रवाल को सम्मानित किया गया।

प्रकृति से प्रेरणा लेकर शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ें वैज्ञानिक
 इस अवर पर बतौर मुख्य अतिथि इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस बैंगलोर के साइंटिस्ट डॉ. अजय सूद ने कहा कि विज्ञान खेल की तरह है जिसकी कोई सीमाएं नहीं हैं। प्रकृति भी हमें विज्ञान से जोड़ती है और प्रेरणा देती है। लोहे के सक्रिय कणों के गमन पर शोध की प्रेरणा उन्हें चीटियों से मिली। प्रकृति हमें बहुत कुछ सीखाती है। देश के वैज्ञानिकों को प्रकृति से प्रेरणा लेकर शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा की वैज्ञानिकों को प्रकृति से प्रेरणा लेनी चाहिए।
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उन्होंने अपनी प्रयोगशाला में हो रहे एक प्रयोग के बारे में बताया कि उसकी प्रेरणा उन्हें चीटियों के सामूहिक गमन को देखकर मिली। उन्होंने बताया कि चीटियों को देखकर उन्होंने लोहे के सक्रिय कणों के गमन पर शोध की। निर्जीव वस्तुओं को ऊर्जा द्वारा सक्रिय किया जा सकता है और वे अपने गमन में चीटियों जैसा ही बर्ताव करते हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रयोग के नतीजे विभिन्न प्रकार की समस्याओं के उत्तर खोजने में मददगार साबित हो सकते हैं।

विश्व को विज्ञान एवं वेदांत भारत से ही मिले
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केयू के वीसी डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने स्वामी विवेकानंद द्वारा कही गई बात को दोहराते हुए कहा कि विश्व को विज्ञान एवं वेदांत भारत से ही मिले हैं। वेदांत एवं विज्ञान में भारतीय रक्त बहता है। स्वतंत्रता के पश्चात एवं पिछले 7 दशकों में भारत के वैज्ञानिकों ने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण तो 8 बड़े वैज्ञानिकों का हमारे बीच मौजूद होना ही है। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए भी बड़े गौरव की बात है कि हमारे विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों प्रो. जेके खुराना व डॉ. मुकेश जैन को भी गोयल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।   
            
गोयल अवार्ड कमेटी के संयोजक प्रो. रजनीश शर्मा ने देशभर के वैज्ञानिकों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के लिए यह गर्व का विषय है कि अब तक गोयल अवार्ड कमेटी 94 वैज्ञानिकों को सम्मानित कर चुकी है। मंच का संचालन छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. पवन शर्मा ने किया। मौके पर केयू के रजिस्ट्रार डा. प्रवीण सैनी, डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. अनिल वोहरा, प्रो. श्याम कुमार, प्रो. तेजेंद्र शर्मा, प्रो. आरके मोदगिल, प्रो. हरि सिंह, डीन, विभिन्न विभागों के चेयरमैन व बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद थे।

इन वैज्ञानिकों को मिला सम्मान         
वैज्ञानिक डॉ मनिद्र अग्रवाल            
गोयल अवार्ड से सम्मानित डॉ. मनिद्र अग्रवाल का जन्म 20 मई 1966 को इलाहाबाद में हुआ। उन्होंने आईईटी कानपुर से पीएचडी की डिग्री लेने के बाद चेन्नई गणित संस्थान में बतौर शोधार्थी ज्वाइन किया। इसके बाद वे जर्मनी की उल्म विश्वविद्यालय में गए व बाद में आईआईटी कानपुर में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में ज्वाइन किया। अप्लाईड साइंस में अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया गया है। वे यूएसए की नेशनल एकेडमी आफ साइंस के फौरन एसोसिएट हैं व वर्ल्ड अकादमी आफ साइंस के फैलो रहे हैं।         

वैज्ञानिक डॉ. एस चंद्रशेखर            
डॉ. एस चंद्रशेखर का जन्म 1964 में हुआ। ओस्मानिया विश्वविद्यालय से एमएससी करने के बाद उन्होंने सीएसआईआर भारतीय रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान, हैदराबाद से पीएचडी की। इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी आफ टैक्सास से पोस्ट डाक्टरेल करने बाद सीएसआईआर, आईआईसीटी में 1994 में एक वैज्ञानिक के रूप में ज्वाइन किया। रसायन विज्ञान के क्षेत्र में दुर्लभ समुद्री प्राकृतिक उत्पादों पर अपने शोध कार्य के लिए इनका चयन किया गया है। डॉ. चंद्रशेखर के 270 से अधिक शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं।

वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र पाल खुराना            
डॉ. जितेंद्र पॉल खुराना का जन्म 1954 में हुआ। 1975 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एमएससी करने के बाद 1982 में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएचडी की। इसके बाद वे स्मिथसोनियन संस्थान, वाशिंगटन डीसी में उन्होंने काम किया। उन्हें संकेत धारणा और पौधों में पारगमन पर अपने शोध कार्य के लिए जीव विज्ञान के क्षेत्र में गोयल पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्होंने सर जेसी बोस फैलोशिप भी प्राप्त की है। लाइफ साइंस के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें गोयल अवार्ड से सम्मानित किया गया है।       

वैज्ञानिक डॉ. राहुल पंडित            
डॉ. राहुल पंडित का जन्म 22 अप्रैल 1956 को दिल्ली में हुआ। आईआईटी दिल्ली से एमएससी करने के बाद उन्होंने अमेरिका से पीएचडी की। 1984 में वे भारत लौटे और तब से वे इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस बैंगलोर में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। फिजिकल साइंस में योगदान के लिए उन्हें गोयल अवार्ड से सम्मानित किया गया है।
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